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Hanuman Chalisa | हनुमान चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026

Tilak Kathayein01 Apr 2026243 views📖 1 min read
हनुमान चालीसा – Hanuman Chalisa
हनुमान चालीसा – सम्पूर्ण पाठ, शब्दार्थ, विधि और लाभ। 2026 में हनुमान चालीसा हिंदी में पढ़ें।

हनुमान चालीसा – परिचय

हनुमान चालीसा भगवान हनुमान की स्तुति में रचित चालीस चौपाइयों का एक भक्तिमय स्तोत्र है। यह गोस्वामी तुलसीदास द्वारा सोलहवीं शताब्दी में लिखी गई, और तब से यह भारत में सबसे लोकप्रिय हिन्दू भक्ति रचनाओं में से एक बन गई है। हनुमान चालीसा में भगवान हनुमान के गुणों, शक्ति और भक्ति का वर्णन है।

हनुमान चालीसा रामचरितमानस की ग्रंथ-परंपरा से जुड़ी है और इसका ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। यह भक्तों को शक्ति, साहस और सुरक्षा प्रदान करती है। इसके नियमित पाठ से भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और वे भगवान हनुमान के प्रति अपनी श्रद्धा को और अधिक मजबूत करते हैं।

हनुमान चालीसा – सम्पूर्ण पाठ

श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवनकुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।।
शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन।।
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्रजी के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद शारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कवि कोविद कहि सके कहां ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
युग सहस्त्र योजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना।।
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिशाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों युग प्रताप तुम्हारा।
है प्रसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै।।
अंत काल रघुवर पुर जाई।
जहां जन्म हरि भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेई सर्व सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।
जो यह पढ़े हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

शब्द-अर्थ और भावार्थ

श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। इसका शब्दार्थ है: श्री गुरु के कमल रूपी चरणों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ करता हूँ। इसका भावार्थ है कि तुलसीदास जी अपने गुरु के चरणों की वंदना करते हुए कहते हैं कि गुरु की कृपा से ही मन की अशुद्धियाँ दूर होती हैं और ज्ञान का प्रकाश फैलता है।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। इस चौपाई में हनुमान जी को ज्ञान और गुणों का सागर कहा गया है, जो उनकी बुद्धिमत्ता और श्रेष्ठता को दर्शाता है। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। इस चौपाई में हनुमान जी को कपियों का ईश और तीनों लोकों को प्रकाशित करने वाला बताया गया है। रामदूत अतुलित बल धामा। यहाँ हनुमान जी को राम के दूत और अतुलनीय शक्ति के भंडार के रूप में वर्णित किया गया है। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।। इस चौपाई में हनुमान जी को अंजनी के पुत्र और पवनदेव के पुत्र के रूप में स्मरण किया गया है। महाबीर बिक्रम बजरंगी। इस चौपाई में हनुमान जी को महावीर, पराक्रमी और वज्र के समान शक्तिशाली बताया गया है।

हनुमान चालीसा में हनुमान की महिमा विशेष रूप से उनके राम भक्ति, शक्ति, और संकटमोचन रूप में वर्णित है। इसमें उनकी अपार शक्ति का वर्णन है, जिससे वे असंभव कार्यों को भी संभव कर देते हैं। साथ ही, यह भी बताया गया है कि वे अपने भक्तों को सभी प्रकार के संकटों से बचाते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

पाठ विधि और नियम

हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए मंगलवार और शनिवार के दिन सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। इसके अलावा, सुबह और शाम का समय भी पाठ के लिए उत्तम है। आप अपनी श्रद्धा और आवश्यकता के अनुसार एक या अधिक पाठ कर सकते हैं। पाठ करने से पहले स्नान करके पवित्र हो जाएं।

हनुमान चालीसा का पाठ करने से पहले एक दीपक जलाएं, धूप करें, और कुछ फूल अर्पित करें। लाल रंग का आसन बिछाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। शांत और स्थिर मन से पाठ करें।

हनुमान चालीसा का पाठ हनुमान जयंती, रामनवमी और अन्य हिन्दू त्योहारों पर विशेष फलदायी होता है। इसके अलावा, किसी भी व्रत या विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए भी इसका पाठ किया जा सकता है।

हनुमान चालीसा के लाभ

  • हनुमान की विशेष कृपा – हनुमान चालीसा का पाठ करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। वे अपने भक्तों को शक्ति, साहस और सुरक्षा प्रदान करते हैं।
  • मनोकामना पूर्ति – हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह धन, विद्या, स्वास्थ्य और समृद्धि जैसी इच्छाओं को पूर्ण करने में सहायक है।
  • भय और संकट से रक्षा – हनुमान चालीसा का पाठ भक्तों को भय और संकट से बचाता है। यह नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।
  • मानसिक शांति – हनुमान चालीसा का नियमित पाठ मन को शांत और स्थिर करता है। इससे तनाव और चिंता कम होती है और मानसिक शांति का अनुभव होता है।
  • मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति – हनुमान चालीसा का पाठ मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग को प्रशस्त करता है। यह भक्तों को भगवान के प्रति अपनी भक्ति को बढ़ाने में मदद करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हनुमान चालीसा कितने समय में पढ़ी जाती है?

सामान्यतः हनुमान चालीसा का पाठ करने में लगभग 5 से 10 मिनट लगते हैं। सामान्य पाठ में केवल चालीसा का पाठ किया जाता है, जबकि विस्तारित पाठ में पहले हनुमान जी की स्तुति और अंत में आरती भी शामिल होती है।

क्या महिलाएं हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं?

हां, महिलाएं हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं। इसमें कोई निषेध नहीं है, क्योंकि हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं और वे सभी भक्तों पर समान रूप से कृपा करते हैं। पवित्रता का ध्यान रखना आवश्यक है।

हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

दैनिक रूप से हनुमान चालीसा का एक बार पाठ करना उत्तम माना जाता है। विशेष अवसरों पर या अपनी इच्छा अनुसार आप इसे 3, 5, 7 या 11 बार भी पढ़ सकते हैं।

निष्कर्ष

हनुमान चालीसा में गहरी आध्यात्मिक शक्ति निहित है, और यह हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र प्रार्थनाओं में से एक मानी जाती है। प्राचीन परंपराओं के अनुसार, इसका नियमित पाठ एक भक्त के जीवन को पूरी तरह से बदल देता है, उसे साहस, शक्ति और शांति प्रदान करता है। यह न केवल संकटों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति को भी बढ़ाता है।

हम आपको प्रोत्साहित करते हैं कि आप हनुमान चालीसा को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाएं। यह आपको भगवान हनुमान के करीब ले जाएगा और आपके जीवन को खुशियों से भर देगा। जय हनुमान!

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