नरसिंह अवतार कथा – अध्याय 5: भगवान् का प्रश्न
नरसिंह अवतार कथा का अध्याय 5 — भगवान् का प्रश्न। हिरण्यकशिपु प्रह्लाद से पूछता है कि क्या विष्णु सर्वव्यापी है, और क्या वह खंभे में मौजूद है, जिससे तनाव बढ़ता है।
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नरसिंह अवतार कथा का अध्याय 5 — भगवान् का प्रश्न। हिरण्यकशिपु प्रह्लाद से पूछता है कि क्या विष्णु सर्वव्यापी है, और क्या वह खंभे में मौजूद है, जिससे तनाव बढ़ता है।

सत्यनारायण कथा का अध्याय 4 — राजा की बेटी और उद्धार। राजा की बेटी व्यापारी की रिहाई में मदद करती है, और एहसास होने पर व्यापारी फिर से व्रत का पालन करता है, जिससे उसे और उसके परिवार को खुशी मिलती है।

सुदामा और कृष्ण कथा का अध्याय 1 — बचपन के मित्र और गुरुकुल। सुदामा और कृष्ण एक गुरुकुल में मिलते हैं और एक प्रगाढ़ दोस्ती शुरू करते हैं, सांदीपनि मुनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करते हैं।

लंका विजय कथा का अध्याय 7 — सेतु बंधन। राम की सेना समुद्र पर सेतु बनाती है और लंका की ओर प्रस्थान करती है।

सावित्री सत्यवान कथा का अध्याय 5 — सावित्री यमराज का पीछा करती है। यमराज सत्यवान के आत्मा को ले जाते हैं, और सावित्री दृढ़ता से उनका पीछा करती है, अपनी बुद्धि और भक्ति से यमराज को प्रभावित करती है।

राधा कृष्ण प्रेम कथा का अध्याय 8 — महाभारत का युद्ध। कृष्ण अर्जुन के सारथी बनकर महाभारत के युद्ध में धर्म की स्थापना करते हैं और अर्जुन को गीता का उपदेश देते हैं।

कुरुक्षेत्र युद्ध कथा का अध्याय 6 — युद्ध का आरंभ। कुरुक्षेत्र का युद्ध शुरू होता है, जिसमें दोनों पक्षों के योद्धा वीरता से लड़ते हैं और कई महत्वपूर्ण योद्धा मारे जाते हैं।

गणेश चतुर्थी व्रत कथा का अध्याय 3 — चंद्रमा का शाप और प्रायश्चित। चंद्रमा ने गणेश के पेट को देखकर उपहास किया, जिससे गणेश ने उसे श्राप दिया कि कोई भी चतुर्थी के दिन उसे नहीं देखेगा।

राम सेतु निर्माण कथा का अध्याय 2 — वानर सेना का संगठन। सुग्रीव और हनुमान के नेतृत्व में वानर सेना का संगठन होता है, जिसमें नल और नील जैसे कुशल शिल्पी भी शामिल होते हैं जो पुल बनाने में सक्षम हैं।

प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का अध्याय 6 — नरसिंह अवतार का आगमन। जब हिरण्यकशिपु प्रह्लाद को मारने का अंतिम प्रयास करता है, तब भगवान विष्णु नरसिंह अवतार में प्रकट होकर उसका वध करते हैं।
नरसिंह अवतार कथा का अध्याय 4 — होलिका का असफल प्रयास। हिरण्यकशिपु अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को अग्नि में भस्म करने के लिए भेजता है, लेकिन होलिका खुद जल जाती है।

सत्यनारायण कथा का अध्याय 3 — धनवान व्यापारी की यात्रा। एक धनी व्यापारी अपने दामाद के साथ व्यापार के लिए जाता है, सत्यनारायण व्रत का पालन करने की प्रतिज्ञा करता है, लेकिन भूल जाता है, जिससे दुर्भाग्य आता है।