
Govardhan Parvat Katha – Chapter 5: Indra's Humility: A Lesson Learned
गोवर्धन पर्वत कथा का अध्याय 5 — इंद्र की विनम्रता: सीखा सबक। इंद्र को अपनी गलती का एहसास होता है, कृष्ण से क्षमा मांगते हैं, और गोवर्धन पर्वत की श्रेष्ठता को स्वीकार करते हैं।
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गोवर्धन पर्वत कथा का अध्याय 5 — इंद्र की विनम्रता: सीखा सबक। इंद्र को अपनी गलती का एहसास होता है, कृष्ण से क्षमा मांगते हैं, और गोवर्धन पर्वत की श्रेष्ठता को स्वीकार करते हैं।

गोवर्धन पर्वत कथा का अध्याय 4 — कृष्ण ने उठाया गोवर्धन। कृष्ण गोकुलवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लेते हैं, जिससे सभी को आश्रय मिलता है।

गोवर्धन पर्वत कथा का अध्याय 3 — इंद्र का क्रोध: घनघोर वर्षा। इंद्र गोवर्धन पूजा से क्रोधित होकर गोकुल पर भयंकर वर्षा कराते हैं, जिससे लोगों को खतरा होता है।

गोवर्धन पर्वत कथा का अध्याय 2 — गोवर्धन: एक वैकल्पिक पूजा। कृष्ण गोकुलवासियों को इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित करते हैं, क्योंकि यह उनकी जीविका का स्रोत है।

गोवर्धन पर्वत कथा का अध्याय 1 — गोकुल: इंद्र का वैदिक अभिमान। गोकुल के निवासी इंद्र की पूजा करते हैं, जिससे कृष्ण को उनके अभिमान के बारे में पता चलता है।