
Durga Saptashati Katha – Chapter 5: The Challenge of Shumbha-Nishumbha
दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 5 — शुम्भ-निशुम्भ की चुनौती। शुम्भ और निशुम्भ नामक दो शक्तिशाली असुर स्वर्ग पर आक्रमण करते हैं और देवी दुर्गा से युद्ध करने की चुनौती देते हैं।
193 articles

दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 5 — शुम्भ-निशुम्भ की चुनौती। शुम्भ और निशुम्भ नामक दो शक्तिशाली असुर स्वर्ग पर आक्रमण करते हैं और देवी दुर्गा से युद्ध करने की चुनौती देते हैं।

दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 4 — महिषासुर का अंत। महिषासुर नामक असुर देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लेता है, जिसके बाद सभी देवता मिलकर देवी दुर्गा का आह्वान करते हैं और देवी महिषासुर का वध करती हैं।

दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 3 — मधुकैटभ का वध। भगवान विष्णु की योगनिद्रा से मधु और कैटभ नामक दो राक्षस उत्पन्न होते हैं, जो ब्रह्मा जी को मारने के लिए उद्यत होते हैं, तब देवी महामाया प्रकट होकर उनका वध करती हैं।

दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 2 — देवी माहात्म्य: ज्ञान की खोज। राजा सुरथ और समाधि मुनि से संसार की माया और ज्ञान के बारे में प्रश्न पूछते हैं, जिसके उत्तर में मुनि देवी महात्म्य का वर्णन करते हैं।

दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 1 — महामाया की महिमा: परिचय। राजा सुरथ और समाधि नामक व्यापारी की कहानी से दुर्गा सप्तशती की महिमा का परिचय होता है, जो अपनी समस्याओं के समाधान के लिए देवी की शरण में जाते हैं।

शीतला सातम, जिसे शीतला सप्तमी भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस...

दशामाता व्रत (या दशा माता व्रत) मुख्यतः गुजरात, राजस्थान और मध्य भारत में महिलाओं द्वारा किया जाने वाला एक पवित्र व्रत है। यह व्रत परिवार की सुख-समृद्धि, दसों दिशाओं की…

गायत्री माता को वेदों की जननी और ज्ञान, प्रकाश, और सद्गुणों की देवी माना जाता है। उनकी आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति होती…

अंबाजी माता को शक्ति, साहस, और समृद्धि की देवी माना जाता है। उनकी पूजा और व्रत करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति प्राप्त होती है।

संतोषी माता व्रत और कथा का पालन भारत में बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाता है। यह व्रत मुख्यतः शुक्रवार को किया जाता है और इसे करने से...

यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारंभ होता है। यह व्रत सोलह दिनों तक किया जाता है। इस दिन स्नान करके सोलह बार हाथ, पैर और मुंह धोने के उपरांत...

यह व्रत किसी भी मंगलवार को किया जा सकता है। व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठें, नहाएं नहीं, आशापुरा मां की तस्वीर को कंडे या पाटले पर रखें, घी का…