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Chapter 6 : Dhyana Yoga – अध्याय ६: ध्यानयोग
भागवद गीता

Chapter 6 : Dhyana Yoga – अध्याय ६: ध्यानयोग

श्रीभगवानुवाच: अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः । स सन्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रियः ॥ श्रीभगवान् बोले- जो पुरुष कर्मफलका आश्रय न लेकर करनेयोग्य कर्म करता है, वह सन्यासी है और योगी भी है, केवल अग्निहोत्र न करनेवाला या कर्म न करनेवाला सन्यासी नहीं है।

31 Jan 2025101
Chapter 5 : Sannyasa Yoga – अध्याय ५: कर्म संन्यास योग
भागवद गीता

Chapter 5 : Sannyasa Yoga – अध्याय ५: कर्म संन्यास योग

अर्जुन उवाच: सन्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि । यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम् ॥ अर्जुन बोले- हे कृष्ण! आप कर्मोंके संन्यासकी और फिर कर्मयोगकी प्रशंसा करते हैं। इसलिये इन…

18 Jan 2025100
Chapter 4 : Gnana Karma Sanyasa Yoga – अध्याय ४: ज्ञानकर्मसंन्यासयोग
भागवद गीता

भगवद गीता अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग

भगवद गीता का चौथा अध्याय “ज्ञान कर्म संन्यास योग” है। इसमें श्री कृष्ण ने आत्मज्ञान, निष्काम कर्म और दिव्य ज्ञान के माध्यम से कर्तव्यों के निर्वहन को समझाया है। श्रीभगवानुवाच:…

16 Jan 2025103
Chapter 3 : Karma Yoga – अध्याय ३: कर्मयोग
भागवद गीता

Chapter 3 : Karma Yoga – अध्याय ३: कर्मयोग

भगवद गीता का तीसरा अध्याय “कर्म योग” पर आधारित है, जिसमें श्री कृष्ण ने कर्म करने, बिना फल की चिंता किए, अपने धर्म का पालन करने और आत्म-निर्भरता की महत्ता…

14 Jan 202569