10 सितम्बर 2026 का चौघड़िया - दिन-रात के शुभ और अशुभ मुहूर्त
गुरुवार | 🌅 06:12 AM — 🌇 06:37 PM
दिन चौघड़िया — 10 सितम्बर 2026
06:12 AM — 06:37 PM
रात चौघड़िया — 10 सितम्बर 2026
06:37 PM — अगले दिन sunrise तक
📖 सात चौघड़िया परिचय
✓ करें: विवाह, गृहप्रवेश, व्यापार, यात्रा, सभी मांगलिक कार्य
✓ करें: विवाह, पूजा-अर्चना, नई वस्तु खरीद, गृहप्रवेश
✓ करें: व्यापार, नया कार्य, शिक्षा, निवेश, समझौता
✓ करें: यात्रा, गमन, वाहन खरीद, परिवर्तन के कार्य
✗ टालें: विवाह, स्थायी कार्य
✓ करें: सरकारी कार्य, संघर्ष, साहसिक कार्य
✗ टालें: विवाह, व्यापार, शुभ कार्य
✓ करें: लोहे / काले वस्तु की खरीद, विशेष साधना
✗ टालें: विवाह, गृहप्रवेश, यात्रा
✓ करें: दुश्मन से मुकाबला, चिकित्सा कार्य
✗ टालें: विवाह, यात्रा, नया कार्य
📖 चौघड़िया क्या है और इसका उपयोग कैसे करें
चौघड़िया हिंदू ज्योतिष में समय विभाजन की एक लोकप्रिय पद्धति है। "चौघड़िया" शब्द "चार घड़ी" से बना है — प्रत्येक चौघड़िया लगभग 1.5 घंटे (96 मिनट) का होता है। दिन में सूर्योदय से सूर्यास्त तक 8 और रात में 8 चौघड़िया होते हैं।
सात चौघड़िया — अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल और रोग — वार के अनुसार एक निश्चित क्रम में आते हैं। अमृत, शुभ और लाभ सर्वश्रेष्ठ हैं, जबकि काल, रोग और उद्वेग से बचना चाहिए।
📜 चौघड़िया का इतिहास और उत्पत्ति
चौघड़िया पद्धति प्राचीन भारतीय ज्योतिष का एक सरल किंतु प्रभावी हिस्सा है, जो सामान्य जनमानस के लिए बिना जटिल गणना के दैनिक शुभ-अशुभ समय जानने का माध्यम बनी। यह पद्धति सैकड़ों वर्षों से उत्तर भारत में विशेष रूप से लोकप्रिय रही है।
"चौघड़िया" शब्द की व्युत्पत्ति
'चौघड़िया' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है — 'चार' और 'घड़ी'। प्राचीन काल में समय को 'घड़ी' नामक इकाई से मापा जाता था, जहाँ एक घड़ी लगभग 24 मिनट के बराबर होती थी। चार घड़ी मिलाकर एक चौघड़िया बनता है, जो लगभग 96 मिनट (1.5 घंटे) का होता है।
प्राचीन जल-घड़ी और समय मापन पद्धति
प्राचीन भारत में समय मापने के लिए जल-घड़ी (घटी यंत्र) का उपयोग होता था, जिसमें एक निश्चित बर्तन से पानी टपकने की गति के आधार पर समय गिना जाता था। इसी परंपरा से 'घड़ी' शब्द और आधुनिक चौघड़िया प्रणाली की नींव पड़ी।
✅ कौन से चौघड़िया में क्या करें?
अमृत (चंद्र)
करें: विवाह, गृहप्रवेश, व्यापार, यात्रा, सभी मांगलिक कार्य
सर्वश्रेष्ठ — सभी कार्यों के लिए
शुभ (गुरु)
करें: विवाह, पूजा, धार्मिक कार्य, नई वस्तु खरीद
धार्मिक और सांसारिक दोनों के लिए उत्तम
लाभ (बुध)
करें: व्यापार, शिक्षा, निवेश, समझौता
धन व व्यापार के लिए विशेष उत्तम
चर (शुक्र)
करें: यात्रा, वाहन खरीद, परिवर्तन के कार्य
स्थायी कार्यों से बचें
उद्वेग (सूर्य)
करें: सरकारी कार्य, प्रतिस्पर्धा
शुभ कार्यों से बचें
काल (शनि)
करें: लोहे की खरीद, विशेष साधना
विवाह व यात्रा वर्जित
रोग (मंगल)
करें: दुश्मन से मुकाबला, चिकित्सा कार्य
नए कार्यों और विवाह से बचें
🧮 चौघड़िया की गणना कैसे होती है
प्रत्येक दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक के कुल समय को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है — यही दिन के 8 चौघड़िया बनते हैं। इसी प्रकार सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक का समय भी 8 बराबर भागों में बाँटकर रात्रि के 8 चौघड़िया निकाले जाते हैं। चूँकि दिन और रात की लंबाई मौसम के अनुसार बदलती रहती है, इसलिए हर चौघड़िया की अवधि भी दिन-प्रतिदिन थोड़ी घटती-बढ़ती रहती है।
🌓 दिन और रात्रि चौघड़िया में अंतर
दिन के चौघड़िया सूर्योदय से आरंभ होकर सूर्यास्त तक चलते हैं, जबकि रात्रि के चौघड़िया सूर्यास्त से शुरू होकर अगले सूर्योदय तक रहते हैं। दोनों में सातों चौघड़िया (अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल, रोग) आते हैं, परंतु उनका क्रम वार के अनुसार अलग-अलग होता है।
🔄 वार अनुसार चौघड़िया का क्रम कैसे बदलता है
प्रत्येक वार का पहला चौघड़िया उस दिन के स्वामी ग्रह के अनुसार निश्चित होता है — जैसे रविवार का पहला चौघड़िया उद्वेग होता है, जबकि सोमवार का पहला चौघड़िया अमृत होता है। इसी आधार पर आगे के सभी चौघड़िया एक निश्चित क्रम में चलते हैं, और यह क्रम प्रतिदिन उस दिन के वार के अनुसार बदलता रहता है।
⚖️ चौघड़िया बनाम राहुकाल — क्या अंतर है
चौघड़िया पूरे दिन-रात को 16 भागों (8+8) में बाँटता है और हर भाग को शुभ या अशुभ श्रेणी देता है, जबकि राहुकाल केवल एक निश्चित लगभग 1.5 घंटे की अशुभ अवधि है जो दिन में एक ही बार आती है। दोनों पद्धतियाँ अलग-अलग हैं, परंतु किसी भी शुभ कार्य के लिए दोनों को साथ में देखना उत्तम माना जाता है।
💍 विवाह के लिए चौघड़िया चयन
विवाह जैसे मांगलिक कार्य के लिए अमृत, शुभ या लाभ चौघड़िया को चुना जाता है, विशेषकर जब वह पंचांग के अन्य शुभ योग-नक्षत्रों से भी मेल खाता हो। काल, रोग और उद्वेग चौघड़िया में विवाह पूर्णतः वर्जित माना जाता है, और इन्हें राहुकाल के साथ भी मिलाकर देखा जाता है।
🚗 यात्रा के लिए चौघड़िया चयन
लंबी यात्रा शुरू करने के लिए अमृत, शुभ, लाभ या चर चौघड़िया शुभ माने जाते हैं। चर चौघड़िया विशेष रूप से यात्रा और स्थान-परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है, हालाँकि इसमें विवाह जैसे स्थायी प्रकृति के कार्य वर्जित रहते हैं।
💼 व्यापार और नए कार्य के लिए चौघड़िया
नया व्यापार शुरू करने, समझौता करने या निवेश करने के लिए लाभ चौघड़िया को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि इसका स्वामी बुध ग्रह बुद्धि और व्यापार का कारक है। शुभ और अमृत चौघड़िया भी इन कार्यों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
🕉 चौघड़िया और मुहूर्त में अंतर
चौघड़िया एक सरल और त्वरित पद्धति है जो सामान्य दैनिक कार्यों के लिए उपयोग होती है, जबकि मुहूर्त पंचांग के सभी पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — की गहन गणना पर आधारित होता है, और विवाह जैसे बड़े संस्कारों के लिए अधिक सटीक माना जाता है।
🗺️ शहर के अनुसार चौघड़िया समय क्यों बदलता है
चूँकि चौघड़िया की गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित है, इसलिए दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद जैसे अलग-अलग शहरों में एक ही चौघड़िया का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। सटीक जानकारी के लिए अपने शहर के अनुसार पंचांग देखना आवश्यक है।
💡 चौघड़िया पढ़ने के व्यावहारिक टिप्स
किसी भी शुभ कार्य से पहले सबसे पहले उस दिन का चौघड़िया चार्ट देखें, फिर देखें कि क्या वह समय राहुकाल से टकरा तो नहीं रहा। छोटे और तात्कालिक कार्यों — यात्रा, खरीदारी, बातचीत — के लिए चौघड़िया देखना पर्याप्त है, जबकि विवाह-गृहप्रवेश जैसे बड़े निर्णयों के लिए संपूर्ण मुहूर्त परामर्श उत्तम रहता है।
⚡ सामान्य गलतियाँ
बहुत से लोग केवल चौघड़िया का नाम देखकर निर्णय ले लेते हैं, बिना यह जाँचे कि वह समय राहुकाल या यमगंड से मेल तो नहीं खा रहा। एक और सामान्य भूल यह है कि रात्रि चौघड़िया की गणना को दिन के समान मान लिया जाता है, जबकि इसका आरंभ बिंदु सूर्यास्त होता है, सूर्योदय नहीं।
🌑 काल और रोग चौघड़िया में भी कुछ विशेष कार्य संभव हैं
यद्यपि काल और रोग चौघड़िया सामान्यतः अशुभ माने जाते हैं, परंतु इनका भी विशेष उपयोग है। काल चौघड़िया विशेष तांत्रिक साधना, गुप्त कार्य और शत्रु-नाशक अनुष्ठानों के लिए उपयुक्त माना जाता है, जबकि रोग चौघड़िया शत्रु पर विजय पाने या प्रतिस्पर्धा से जुड़े कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है — क्योंकि इनका स्वभाव ही संघर्ष और तीव्रता से जुड़ा है।
🎆 त्योहारों के दिन चौघड़िया का विशेष महत्व
दिवाली, धनतेरस और अक्षय तृतीया जैसे शुभ त्योहारों के दिन विशेष रूप से लाभ और अमृत चौघड़िया में खरीदारी, पूजा और नए कार्यों का आरंभ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इन दिनों करोड़ों लोग चौघड़िया देखकर ही खरीदारी और पूजा का समय तय करते हैं।
📲 चौघड़िया ऐप और वेबसाइट का बढ़ता प्रचलन
पिछले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन के प्रचलन के साथ चौघड़िया ऐप और वेबसाइट का उपयोग तेजी से बढ़ा है। लोग अब यात्रा से पहले, खरीदारी से पहले या किसी भी छोटे कार्य से पहले तुरंत अपने फोन पर चौघड़िया चार्ट देख लेते हैं। इस पृष्ठ पर आपके शहर के अनुसार सटीक चौघड़िया समय स्वतः उपलब्ध हो जाता है, जिससे मैनुअल गणना की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
🚧 चौघड़िया की सीमाएँ — यह किन कार्यों के लिए पर्याप्त नहीं है
चौघड़िया छोटे और दैनिक कार्यों के लिए तो उपयुक्त है, परंतु विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, उपनयन जैसे बड़े संस्कारों के लिए इसे पर्याप्त नहीं माना जाता। ऐसे अवसरों पर संपूर्ण पंचांग सहित जन्म कुंडली और नक्षत्र-योग का गहन विश्लेषण आवश्यक होता है, जिसके लिए अनुभवी ज्योतिषी की सलाह लेनी चाहिए।
✈️ विदेश यात्रा और वीज़ा कार्य के लिए चौघड़िया
विदेश यात्रा, वीज़ा आवेदन या पासपोर्ट संबंधी कार्यों के लिए भी शुभ चौघड़िया देखी जाती है। लाभ और अमृत चौघड़िया में ऐसे कार्य करने से सफलता की संभावना अधिक मानी जाती है, विशेषकर जब यह गुरुवार या शुक्रवार के दिन हो।
🕉 गुरु और शुक्र चौघड़िया में धार्मिक कार्यों की प्राथमिकता
शुभ (गुरु) और अमृत (चंद्र) चौघड़िया धार्मिक अनुष्ठानों, हवन और पूजा-पाठ के लिए विशेष उपयुक्त मानी जाती हैं, क्योंकि गुरु और चंद्रमा दोनों ही ज्ञान, शांति और भक्ति के कारक ग्रह हैं।
🙏 निष्कर्ष
चौघड़िया भारतीय ज्योतिष की एक सरल, व्यावहारिक और सर्वसुलभ पद्धति है, जो बिना जटिल गणना के दैनिक जीवन में शुभ समय चुनने में सहायक होती है। इस पृष्ठ पर प्रतिदिन अद्यतन चौघड़िया चार्ट देखकर आप अपने दिन के महत्वपूर्ण कार्यों की सही समय पर योजना बना सकते हैं।