5 सितम्बर 2026 का पंचांग – नवमी कृष्ण पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
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5 सितम्बर 2026 का पंचांग

नवमी | कृष्ण पक्ष | भाद्रपद

🌙
तिथि
नवमी
नक्षत्र
मृगशिरा
🌿
योग
वज्र
📿
करण
तैतिल
शहर चुनें:
🌅 06:10 AM   🌇 06:42 PM

📅 पंचांग5 सितम्बर 2026

तिथिनवमी (कृष्ण पक्ष)
मासभाद्रपद (वि.सं. 2083)
वारशनिवार
नक्षत्रमृगशिरा (चंद्रमा)
योगवज्र
करणतैतिल
चंद्र राशिवृष
सूर्य राशिसिंह
🌅 सूर्योदय06:10 AM
🌇 सूर्यास्त06:42 PM

🪐 ग्रह दशा5 सितम्बर 2026

☀️सूर्यसिंह18.3°
🌙चंद्रवृष27.5°
मंगलवृष7.2°
बुधसिंह22.2°
गुरुकर्क9.7°
शुक्रमकर18.2°
शनिमीन21.5°
राहुकुंभ4.9°
केतुसिंह4.9°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌑

🌙 आज की तिथि का महत्व

नवमी · कृष्ण पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: नवमी श्राद्ध, पितृ तर्पण

कृष्ण नवमी पितृ पक्ष में विशेष श्राद्ध तिथि है। पूर्वजों का तर्पण करने से परिवार में सुख-शांति आती है।

✅ आज क्या करें

पितृ श्राद्ध, ब्राह्मण भोजन, दान

⚠️ आज से बचें

शोक में डूबे रहना

⭐ आज का नक्षत्र: मृगशिरा

देवता: चंद्रमा

मृगशिरा खोज और जिज्ञासा का नक्षत्र है। यात्रा और रचनात्मक कार्य शुभ।

✅ आज क्या करें

यात्रा, सौंदर्य, संगीत, रचनात्मक कार्य

⚠️ आज से बचें

जल्दबाज़ी

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

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१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: नवमी (कृष्ण पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: शनिवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: मृगशिरा
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: वज्र
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: तैतिल

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न