3 सितम्बर 2026 का पंचांग – सप्तमी कृष्ण पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
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3 सितम्बर 2026 का पंचांग

सप्तमी | कृष्ण पक्ष | भाद्रपद

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तिथि
सप्तमी
नक्षत्र
कृत्तिका
🌿
योग
व्याघात
📿
करण
विष्टि
शहर चुनें:
🌅 06:10 AM   🌇 06:44 PM

📅 पंचांग3 सितम्बर 2026

तिथिसप्तमी (कृष्ण पक्ष)
मासभाद्रपद (वि.सं. 2083)
वारगुरुवार
नक्षत्रकृत्तिका (अग्नि)
योगव्याघात
करणविष्टि
चंद्र राशिमेष
सूर्य राशिसिंह
🌅 सूर्योदय06:10 AM
🌇 सूर्यास्त06:44 PM

🪐 ग्रह दशा3 सितम्बर 2026

☀️सूर्यसिंह16.3°
🌙चंद्रमेष29.3°
मंगलवृष6.1°
बुधसिंह14°
गुरुकर्क9.6°
शुक्रमकर15°
शनिमीन21.4°
राहुकुंभ5°
केतुसिंह5°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को गुरुवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌘

🌙 आज की तिथि का महत्व

सप्तमी · कृष्ण पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: सप्तमी व्रत

कृष्ण सप्तमी सूर्य उपासना की तिथि है। आरोग्य और ऊर्जा के लिए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना शुभ होता है।

✅ आज क्या करें

सूर्य अर्घ्य, आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ

⚠️ आज से बचें

अहंकार, निराशा

⭐ आज का नक्षत्र: कृत्तिका

देवता: अग्नि

कृत्तिका अग्नि और शुद्धि का नक्षत्र है। धार्मिक अनुष्ठान अत्यंत फलदायी होते हैं।

✅ आज क्या करें

हवन, यज्ञ, साहसिक कार्य

⚠️ आज से बचें

शांतिपूर्ण बातचीत

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

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१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: सप्तमी (कृष्ण पक्ष)
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२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: गुरुवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: कृत्तिका
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: व्याघात
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: विष्टि

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न