🕉

31 अगस्त 2026 का पंचांग - तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल

तृतीया | कृष्ण पक्ष | श्रावण

🌙
तिथि
तृतीया
नक्षत्र
रेवती
🌿
योग
गण्ड
📿
करण
विष्टि
शहर चुनें:
🌅 06:09 AM   🌇 06:46 PM

📅 पंचांग31 अगस्त 2026

तिथितृतीया (कृष्ण पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वारसोमवार
नक्षत्ररेवती (पूषा)
योगगण्ड
करणविष्टि
चंद्र राशिमीन
सूर्य राशिसिंह
🌅 सूर्योदय06:09 AM
🌇 सूर्यास्त06:46 PM

🪐 ग्रह दशा31 अगस्त 2026

☀️सूर्यसिंह13.4°
🌙चंद्रमीन18°
मंगलवृष4.5°
बुधसिंह1.8°
गुरुकर्क9.3°
शुक्रमकर10.2°
शनिमीन21.3°
राहुकुंभ5.1°
केतुसिंह5.1°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌗

🌙 आज की तिथि का महत्व

तृतीया · कृष्ण पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: अखा तीज (वैशाख शुक्ल, विशेष)

कृष्ण तृतीया सौभाग्य की तिथि है। माँ गौरी की उपासना से घर में सुख-शांति और सौभाग्य बना रहता है।

✅ आज क्या करें

पूजा-अर्चना, दान, माँ पार्वती स्तुति

⚠️ आज से बचें

झगड़ा, कठोर वाणी

⭐ आज का नक्षत्र: रेवती

देवता: पूषा

रेवती पोषण और समापन का नक्षत्र है — 27 नक्षत्रों में अंतिम और पूर्ण। यात्रा और नई शुरुआत के लिए शुभ।

✅ आज क्या करें

यात्रा, गृहप्रवेश, नई शुरुआत

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

🌙
१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: तृतीया (कृष्ण पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: सोमवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: रेवती
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: गण्ड
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: विष्टि

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न