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29 अगस्त 2026 का पंचांग - तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल

प्रतिपदा | कृष्ण पक्ष | श्रावण

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तिथि
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद
🌿
योग
सुकर्मा
📿
करण
कौलव
शहर चुनें:
🌅 06:08 AM   🌇 06:48 PM

📅 पंचांग29 अगस्त 2026

तिथिप्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वारशनिवार
नक्षत्रपूर्वा भाद्रपद (अजैकपाद)
योगसुकर्मा
करणकौलव
चंद्र राशिकुंभ
सूर्य राशिसिंह
🌅 सूर्योदय06:08 AM
🌇 सूर्यास्त06:48 PM

🪐 ग्रह दशा29 अगस्त 2026

☀️सूर्यसिंह11.5°
🌙चंद्रकुंभ21.6°
मंगलवृष3.5°
बुधकर्क23.6°
गुरुकर्क9.2°
शुक्रमकर6.9°
शनिमीन21.2°
राहुकुंभ5.2°
केतुसिंह5.2°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं


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🌙 आज की तिथि का महत्व

प्रतिपदा · कृष्ण पक्ष

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व्रत / पर्व: पितृ कार्य, श्राद्ध (अश्विन कृष्ण पक्ष)

कृष्ण प्रतिपदा से कृष्ण पक्ष का आरंभ होता है। पूर्णिमा के बाद चंद्रमा घटने लगते हैं। पितृ कार्य के लिए यह अच्छी तिथि है।

✅ आज क्या करें

पितृ तर्पण, श्राद्ध कर्म, दान, पूजा

⚠️ आज से बचें

नए शुभ कार्यों का आरंभ

⭐ आज का नक्षत्र: पूर्वा भाद्रपद

देवता: अजैकपाद

पूर्वा भाद्रपद वैराग्य और आध्यात्मिकता का नक्षत्र है। साधना कार्य फलदायी होते हैं।

✅ आज क्या करें

साधना, त्याग, आध्यात्मिक कार्य

⚠️ आज से बचें

विलासिता

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

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१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: प्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)
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२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: शनिवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: पूर्वा भाद्रपद
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४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: सुकर्मा
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५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: कौलव

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न