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28 अगस्त 2026 का पंचांग - तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल

पूर्णिमा | शुक्ल पक्ष | श्रावण

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तिथि
पूर्णिमा
नक्षत्र
शतभिषा
🌿
योग
अतिगण्ड
📿
करण
बव
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🌅 06:08 AM   🌇 06:49 PM

📅 पंचांग28 अगस्त 2026

तिथिपूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वारशुक्रवार
नक्षत्रशतभिषा (वरुण)
योगअतिगण्ड
करणबव
चंद्र राशिकुंभ
सूर्य राशिसिंह
🌅 सूर्योदय06:08 AM
🌇 सूर्यास्त06:49 PM

🪐 ग्रह दशा28 अगस्त 2026

☀️सूर्यसिंह10.5°
🌙चंद्रकुंभ8.7°
मंगलवृष3°
बुधकर्क19.5°
गुरुकर्क9.1°
शुक्रमकर5.3°
शनिमीन21.2°
राहुकुंभ5.3°
केतुसिंह5.3°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को शुक्रवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌕

🌙 आज की तिथि का महत्व

पूर्णिमा · शुक्ल पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: पूर्णिमा व्रत, सत्यनारायण पूजा, गुरु पूर्णिमा

पूर्णिमा अत्यंत शुभ और पवित्र तिथि है। चंद्रमा इस दिन अपनी सोलह कलाओं में पूर्ण होते हैं। दान-पुण्य और तीर्थ स्नान का अपार महत्व है।

✅ आज क्या करें

पवित्र नदी स्नान, दान, पितृ तर्पण, सत्यनारायण कथा, चंद्र अर्घ्य

⚠️ आज से बचें

झूठ, चोरी, बुरी नज़र

⭐ आज का नक्षत्र: शतभिषा

देवता: वरुण

शतभिषा रहस्य और उपचार का नक्षत्र है। ध्यान, साधना और चिकित्सा के लिए उत्तम।

✅ आज क्या करें

चिकित्सा, अनुसंधान, एकांत साधना

⚠️ आज से बचें

सामाजिक समारोह

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

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१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: शुक्रवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: शतभिषा
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: अतिगण्ड
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: बव

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न