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27 अगस्त 2026 का पंचांग - तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल

चतुर्दशी | शुक्ल पक्ष | श्रावण

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तिथि
चतुर्दशी
नक्षत्र
धनिष्ठा
🌿
योग
शोभन
📿
करण
वणिज
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🌅 06:07 AM   🌇 06:50 PM

📅 पंचांग27 अगस्त 2026

तिथिचतुर्दशी (शुक्ल पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वारगुरुवार
नक्षत्रधनिष्ठा (अष्टवसु)
योगशोभन
करणवणिज
चंद्र राशिमकर
सूर्य राशिसिंह
🌅 सूर्योदय06:07 AM
🌇 सूर्यास्त06:50 PM

🪐 ग्रह दशा27 अगस्त 2026

☀️सूर्यसिंह9.6°
🌙चंद्रमकर26.1°
मंगलवृष2.4°
बुधकर्क15.4°
गुरुकर्क9°
शुक्रमकर3.7°
शनिमीन21.2°
राहुकुंभ5.3°
केतुसिंह5.3°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को गुरुवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌘

🌙 आज की तिथि का महत्व

चतुर्दशी · शुक्ल पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: मासिक शिवरात्रि, महाशिवरात्रि (फाल्गुन)

चतुर्दशी मासिक शिवरात्रि की तिथि है। भगवान शिव की आराधना से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

✅ आज क्या करें

शिवलिंग अभिषेक, रात्रि जागरण, महामृत्युंजय जाप, बेलपत्र अर्पण

⚠️ आज से बचें

मांसाहार, मदिरा, तामसिक भोजन

⭐ आज का नक्षत्र: धनिष्ठा

देवता: अष्टवसु

धनिष्ठा धन और संगीत का नक्षत्र है। संगीत और व्यापार के कार्य विशेष शुभ।

✅ आज क्या करें

संगीत, धन संचय, व्यापार

⚠️ आज से बचें

विवाह (कुछ मतों में)

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

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१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: चतुर्दशी (शुक्ल पक्ष)
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२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: गुरुवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: धनिष्ठा
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: शोभन
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: वणिज

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न