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20 अगस्त 2026 का पंचांग - तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल

अष्टमी | शुक्ल पक्ष | श्रावण

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तिथि
अष्टमी
नक्षत्र
विशाखा
🌿
योग
इन्द्र
📿
करण
विष्टि
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🌅 06:05 AM   🌇 06:56 PM

📅 पंचांग20 अगस्त 2026

तिथिअष्टमी (शुक्ल पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वारगुरुवार
नक्षत्रविशाखा (इंद्र-अग्नि)
योगइन्द्र
करणविष्टि
चंद्र राशिवृश्चिक
सूर्य राशिसिंह
🌅 सूर्योदय06:05 AM
🌇 सूर्यास्त06:56 PM

🪐 ग्रह दशा20 अगस्त 2026

☀️सूर्यसिंह2.8°
🌙चंद्रवृश्चिक1.8°
मंगलमेष28.8°
बुधमिथुन16.7°
गुरुकर्क8.4°
शुक्रधनु22.5°
शनिमीन20.9°
राहुकुंभ5.7°
केतुसिंह5.7°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को गुरुवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌕

🌙 आज की तिथि का महत्व

अष्टमी · शुक्ल पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: मासिक दुर्गाष्टमी, जन्माष्टमी (कृष्ण अष्टमी)

अष्टमी माँ दुर्गा की तिथि है। इस दिन दुर्गा पूजा से शत्रुओं पर विजय, सुख-समृद्धि और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।

✅ आज क्या करें

दुर्गा माँ की पूजा, दुर्गा चालीसा, कन्या पूजन, दुर्गा सप्तशती

⚠️ आज से बचें

मांसाहार, व्यसन, झूठ

⭐ आज का नक्षत्र: विशाखा

देवता: इंद्र-अग्नि

विशाखा उद्देश्य और दृढ़ता का नक्षत्र है। लक्ष्य प्राप्ति के प्रयास सफल होते हैं।

✅ आज क्या करें

साहसिक कार्य, प्रतिस्पर्धा, धर्म कार्य

⚠️ आज से बचें

मित्रता में विवाद

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

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१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: अष्टमी (शुक्ल पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: गुरुवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: विशाखा
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: इन्द्र
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: विष्टि

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न