19 अगस्त 2026 का पंचांग – सप्तमी शुक्ल पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
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19 अगस्त 2026 का पंचांग

सप्तमी | शुक्ल पक्ष | श्रावण

🌙
तिथि
सप्तमी
नक्षत्र
स्वाती
🌿
योग
ब्रह्म
📿
करण
गर
शहर चुनें:
🌅 06:05 AM   🌇 06:57 PM

📅 पंचांग19 अगस्त 2026

तिथिसप्तमी (शुक्ल पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वारबुधवार
नक्षत्रस्वाती (वायु)
योगब्रह्म
करणगर
चंद्र राशितुला
सूर्य राशिसिंह
🌅 सूर्योदय06:05 AM
🌇 सूर्यास्त06:57 PM

🪐 ग्रह दशा19 अगस्त 2026

☀️सूर्यसिंह1.9°
🌙चंद्रतुला19.6°
मंगलमेष28.3°
बुधमिथुन12.6°
गुरुकर्क8.3°
शुक्रधनु20.9°
शनिमीन20.9°
राहुकुंभ5.8°
केतुसिंह5.8°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को बुधवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌔

🌙 आज की तिथि का महत्व

सप्तमी · शुक्ल पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: रथ सप्तमी, भानु सप्तमी, सप्तमी व्रत

सप्तमी सूर्यदेव की प्रिय तिथि है। इस दिन सूर्य उपासना से आरोग्य, ऊर्जा, यश और सफलता प्राप्त होती है।

✅ आज क्या करें

सूर्य को अर्घ्य, आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ, लाल फूल अर्पण

⚠️ आज से बचें

तेल व नमक का सेवन (व्रत में)

⭐ आज का नक्षत्र: स्वाती

देवता: वायु

स्वाती स्वतंत्रता और गतिशीलता का नक्षत्र है। व्यापार और यात्रा के लिए विशेष अनुकूल।

✅ आज क्या करें

व्यापार, वाणिज्य, यात्रा

⚠️ आज से बचें

विवाह (कुछ मतों में)

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

🌙
१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: सप्तमी (शुक्ल पक्ष)
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२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: बुधवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: स्वाती
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: ब्रह्म
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: गर

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न