2 अगस्त 2026 का पंचांग – चतुर्थी कृष्ण पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
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2 अगस्त 2026 का पंचांग

चतुर्थी | कृष्ण पक्ष | श्रावण

🌙
तिथि
चतुर्थी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद
🌿
योग
अतिगण्ड
📿
करण
बव
शहर चुनें:
🌅 05:58 AM   🌇 07:09 PM

📅 पंचांग2 अगस्त 2026

तिथिचतुर्थी (कृष्ण पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वाररविवार
नक्षत्रपूर्वा भाद्रपद (अजैकपाद)
योगअतिगण्ड
करणबव
चंद्र राशिकुंभ
सूर्य राशिकर्क
🌅 सूर्योदय05:58 AM
🌇 सूर्यास्त07:09 PM

🪐 ग्रह दशा2 अगस्त 2026

☀️सूर्यकर्क15.5°
🌙चंद्रकुंभ24.9°
मंगलमेष19.3°
बुधमेष3°
गुरुकर्क6.9°
शुक्रवृश्चिक23.7°
शनिमीन20.3°
राहुकुंभ6.7°
केतुसिंह6.7°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को रविवार की हार्दिक शुभकामनाएं


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🌙 आज की तिथि का महत्व

चतुर्थी · कृष्ण पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: संकष्टी चतुर्थी व्रत (चंद्र दर्शन के साथ)

कृष्ण चतुर्थी में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है। रात को चंद्रमा के दर्शन करने के बाद व्रत तोड़ा जाता है।

✅ आज क्या करें

गणेश पूजा, रात को चंद्र दर्शन, मोदक भोग

⚠️ आज से बचें

क्रोध, असत्य वचन

⭐ आज का नक्षत्र: पूर्वा भाद्रपद

देवता: अजैकपाद

पूर्वा भाद्रपद वैराग्य और आध्यात्मिकता का नक्षत्र है। साधना कार्य फलदायी होते हैं।

✅ आज क्या करें

साधना, त्याग, आध्यात्मिक कार्य

⚠️ आज से बचें

विलासिता

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

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१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: चतुर्थी (कृष्ण पक्ष)
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२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: रविवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: पूर्वा भाद्रपद
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: अतिगण्ड
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: बव

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न