30 जुलाई 2026 का पंचांग – प्रतिपदा कृष्ण पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
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30 जुलाई 2026 का पंचांग

प्रतिपदा | कृष्ण पक्ष | श्रावण

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तिथि
प्रतिपदा
नक्षत्र
श्रवण
🌿
योग
आयुष्मान
📿
करण
बालव
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🌅 05:56 AM   🌇 07:10 PM

📅 पंचांग30 जुलाई 2026

तिथिप्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वारगुरुवार
नक्षत्रश्रवण (विष्णु)
योगआयुष्मान
करणबालव
चंद्र राशिमकर
सूर्य राशिकर्क
🌅 सूर्योदय05:56 AM
🌇 सूर्यास्त07:10 PM

🪐 ग्रह दशा30 जुलाई 2026

☀️सूर्यकर्क12.7°
🌙चंद्रमकर17.3°
मंगलमेष17.8°
बुधमीन20.8°
गुरुकर्क6.7°
शुक्रवृश्चिक18.9°
शनिमीन20.2°
राहुकुंभ6.8°
केतुसिंह6.8°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को गुरुवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌖

🌙 आज की तिथि का महत्व

प्रतिपदा · कृष्ण पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: पितृ कार्य, श्राद्ध (अश्विन कृष्ण पक्ष)

कृष्ण प्रतिपदा से कृष्ण पक्ष का आरंभ होता है। पूर्णिमा के बाद चंद्रमा घटने लगते हैं। पितृ कार्य के लिए यह अच्छी तिथि है।

✅ आज क्या करें

पितृ तर्पण, श्राद्ध कर्म, दान, पूजा

⚠️ आज से बचें

नए शुभ कार्यों का आरंभ

⭐ आज का नक्षत्र: श्रवण

देवता: विष्णु

श्रवण श्रवण और ज्ञान का नक्षत्र है। भगवान विष्णु की कृपा से ज्ञान और विद्या प्राप्त होती है।

✅ आज क्या करें

शिक्षा, संचार, धार्मिक अध्ययन

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

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१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: प्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: गुरुवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: श्रवण
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: आयुष्मान
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: बालव

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न