27 जुलाई 2026 का पंचांग – त्रयोदशी शुक्ल पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
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27 जुलाई 2026 का पंचांग

त्रयोदशी | शुक्ल पक्ष | श्रावण

🌙
तिथि
त्रयोदशी
नक्षत्र
मूल
🌿
योग
वैधृति
📿
करण
तैतिल
शहर चुनें:
🌅 05:55 AM   🌇 07:12 PM

📅 पंचांग27 जुलाई 2026

तिथित्रयोदशी (शुक्ल पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वारसोमवार
नक्षत्रमूल (निर्ऋति)
योगवैधृति
करणतैतिल
चंद्र राशिधनु
सूर्य राशिकर्क
🌅 सूर्योदय05:55 AM
🌇 सूर्यास्त07:12 PM

🪐 ग्रह दशा27 जुलाई 2026

☀️सूर्यकर्क9.8°
🌙चंद्रधनु11.1°
मंगलमेष16.2°
बुधमीन8.5°
गुरुकर्क6.4°
शुक्रवृश्चिक14.1°
शनिमीन20.1°
राहुकुंभ7°
केतुसिंह7°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌗

🌙 आज की तिथि का महत्व

त्रयोदशी · शुक्ल पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: प्रदोष व्रत (शिव पूजा सूर्यास्त समय)

त्रयोदशी प्रदोष व्रत की तिथि है। सूर्यास्त के समय शिव-पार्वती की उपासना से मनोवांछित फल और मोक्ष प्राप्त होता है।

✅ आज क्या करें

शिव-पार्वती पूजा, प्रदोष काल में रुद्राभिषेक, सफेद फूल अर्पण

⚠️ आज से बचें

तामसिक भोजन, व्यसन

⭐ आज का नक्षत्र: मूल

देवता: निर्ऋति

मूल जड़ों और गहराई का नक्षत्र है। रहस्य और चिकित्सा से जुड़े कार्य शुभ।

✅ आज क्या करें

अनुसंधान, जड़ी-बूटी, दवाइयाँ

⚠️ आज से बचें

विवाह, नई शुरुआत

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

🌙
१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: त्रयोदशी (शुक्ल पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: सोमवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: मूल
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: वैधृति
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: तैतिल

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न