17 जुलाई 2026 का पंचांग
तृतीया | शुक्ल पक्ष | श्रावण
📅 पंचांग — 17 जुलाई 2026
🪐 ग्रह दशा — 17 जुलाई 2026
🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉
सभी को शुक्रवार की हार्दिक शुभकामनाएं
🌙 आज की तिथि का महत्व
तृतीया · शुक्ल पक्ष
तृतीया माँ गौरी की प्रिय तिथि है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह विशेष पुण्यदायी है और सौभाग्य की रक्षा करती है।
माँ पार्वती की पूजा, सुहागिनें व्रत रखें, हरे वस्त्र पहनें
मांसाहार, व्यसन
⭐ आज का नक्षत्र: मघा
देवता: पितर
मघा राज-सत्ता और पूर्वजों का नक्षत्र है। पितृ कर्म के लिए विशेष महत्वपूर्ण।
पितृ तर्पण, श्राद्ध, नेतृत्व के कार्य
नए उद्यम
📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व
पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।
🕉 पंचांग के पाँच अंग
चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।
आज: तृतीया (शुक्ल पक्ष)सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।
आज: शुक्रवारचंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।
आज: मघासूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।
आज: व्यतीपातएक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।
आज: गर