16 जुलाई 2026 का पंचांग – द्वितीया शुक्ल पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
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16 जुलाई 2026 का पंचांग

द्वितीया | शुक्ल पक्ष | श्रावण

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तिथि
द्वितीया
नक्षत्र
आश्लेषा
🌿
योग
सिद्धि
📿
करण
कौलव
शहर चुनें:
🌅 05:50 AM   🌇 07:15 PM

📅 पंचांग16 जुलाई 2026

तिथिद्वितीया (शुक्ल पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वारगुरुवार
नक्षत्रआश्लेषा (सर्प)
योगसिद्धि
करणकौलव
चंद्र राशिकर्क
सूर्य राशिमिथुन
🌅 सूर्योदय05:50 AM
🌇 सूर्यास्त07:15 PM

🪐 ग्रह दशा16 जुलाई 2026

☀️सूर्यमिथुन29.3°
🌙चंद्रकर्क21.6°
मंगलमेष10.4°
बुधमकर23.5°
गुरुकर्क5.5°
शुक्रतुला26.4°
शनिमीन19.7°
राहुकुंभ7.6°
केतुसिंह7.6°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को गुरुवार की हार्दिक शुभकामनाएं


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🌙 आज की तिथि का महत्व

द्वितीया · शुक्ल पक्ष

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व्रत / पर्व: भाई दूज (कार्तिक शुक्ल द्वितीया)

द्वितीया तिथि सृष्टि के निर्माता ब्रह्माजी को समर्पित है। इस दिन नए कार्य का शुभारंभ और शिक्षा के कार्य शुभ होते हैं।

✅ आज क्या करें

नए व्यापार का आरंभ, शिक्षा प्रारंभ, दान-पुण्य

⚠️ आज से बचें

झूठ बोलना, कलह

⭐ आज का नक्षत्र: आश्लेषा

देवता: सर्प

आश्लेषा सर्पदेवता का नक्षत्र है। गूढ़ विद्याओं और औषधि के कार्य शुभ।

✅ आज क्या करें

औषधि, तंत्र-मंत्र, गूढ़ विद्या

⚠️ आज से बचें

विवाह, शुभ यात्रा

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

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१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: द्वितीया (शुक्ल पक्ष)
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२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: गुरुवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: आश्लेषा
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: सिद्धि
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: कौलव

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न