15 जुलाई 2026 का पंचांग – प्रतिपदा शुक्ल पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
🕉

15 जुलाई 2026 का पंचांग

प्रतिपदा | शुक्ल पक्ष | श्रावण

🌙
तिथि
प्रतिपदा
नक्षत्र
पुष्य
🌿
योग
हर्षण
📿
करण
बव
शहर चुनें:
🌅 05:50 AM   🌇 07:16 PM

📅 पंचांग15 जुलाई 2026

तिथिप्रतिपदा (शुक्ल पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वारबुधवार
नक्षत्रपुष्य (बृहस्पति)
योगहर्षण
करणबव
चंद्र राशिकर्क
सूर्य राशिमिथुन
🌅 सूर्योदय05:50 AM
🌇 सूर्यास्त07:16 PM

🪐 ग्रह दशा15 जुलाई 2026

☀️सूर्यमिथुन28.4°
🌙चंद्रकर्क6.8°
मंगलमेष9.9°
बुधमकर19.4°
गुरुकर्क5.4°
शुक्रतुला24.8°
शनिमीन19.7°
राहुकुंभ7.6°
केतुसिंह7.6°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को बुधवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌒

🌙 आज की तिथि का महत्व

प्रतिपदा · शुक्ल पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: चंद्र दर्शन / गुड़ी पड़वा (चैत्र शुक्ल)

शुक्ल प्रतिपदा से शुभ मास का आरंभ होता है। यह नए कार्यों और यात्रा के लिए अत्यंत शुभ तिथि है।

✅ आज क्या करें

नए कार्य प्रारंभ करें, चंद्र दर्शन करें, पूजा-अर्चना करें

⚠️ आज से बचें

विवाद, नकारात्मक विचार

⭐ आज का नक्षत्र: पुष्य

देवता: बृहस्पति

पुष्य 27 नक्षत्रों में सबसे शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र में शुभ कार्य अत्यंत फलदायी होते हैं।

✅ आज क्या करें

गृहप्रवेश, विवाह, व्यापार, शिक्षा — सर्वाधिक शुभ

⚠️ आज से बचें

यात्रा आरंभ (कुछ मतों में)

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

🌙
१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: प्रतिपदा (शुक्ल पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: बुधवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: पुष्य
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: हर्षण
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: बव

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न