14 जुलाई 2026 का पंचांग – अमावस्या कृष्ण पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
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14 जुलाई 2026 का पंचांग

अमावस्या | कृष्ण पक्ष | आषाढ़

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तिथि
अमावस्या
नक्षत्र
पुनर्वसु
🌿
योग
व्याघात
📿
करण
किंस्तुघ्न
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🌅 05:49 AM   🌇 07:16 PM

📅 पंचांग14 जुलाई 2026

तिथिअमावस्या (कृष्ण पक्ष)
मासआषाढ़ (वि.सं. 2083)
वारमंगलवार
नक्षत्रपुनर्वसु (अदिति)
योगव्याघात
करणकिंस्तुघ्न
चंद्र राशिमिथुन
सूर्य राशिमिथुन
🌅 सूर्योदय05:49 AM
🌇 सूर्यास्त07:16 PM

🪐 ग्रह दशा14 जुलाई 2026

☀️सूर्यमिथुन27.4°
🌙चंद्रमिथुन21.8°
मंगलमेष9.4°
बुधमकर15.3°
गुरुकर्क5.3°
शुक्रतुला23.2°
शनिमीन19.7°
राहुकुंभ7.7°
केतुसिंह7.7°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को मंगलवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌑

🌙 आज की तिथि का महत्व

अमावस्या · कृष्ण पक्ष

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व्रत / पर्व: अमावस्या व्रत, पितृ तर्पण, दर्श अमावस्या

अमावस्या पितरों की तिथि है। इस दिन पितृ तर्पण और श्राद्ध करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है।

✅ आज क्या करें

पितृ तर्पण, गंगा स्नान, श्राद्ध, दान, शिव पूजा

⚠️ आज से बचें

शुभ कार्यों का आरंभ, विवाह, गृहप्रवेश, मांसाहार

⭐ आज का नक्षत्र: पुनर्वसु

देवता: अदिति

पुनर्वसु नवीनता का नक्षत्र है। बहुत शुभ — सफलता और समृद्धि लाता है।

✅ आज क्या करें

गृहप्रवेश, यात्रा, शिक्षा, व्यापार

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

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१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: अमावस्या (कृष्ण पक्ष)
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२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: मंगलवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: पुनर्वसु
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: व्याघात
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: किंस्तुघ्न

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न