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5 जुलाई 2026 का पंचांग - तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल

पंचमी | कृष्ण पक्ष | ज्येष्ठ

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तिथि
पंचमी
नक्षत्र
शतभिषा
🌿
योग
आयुष्मान
📿
करण
तैतिल
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🌅 05:46 AM   🌇 07:17 PM

📅 पंचांग5 जुलाई 2026

तिथिपंचमी (कृष्ण पक्ष)
मासज्येष्ठ (वि.सं. 2083)
वाररविवार
नक्षत्रशतभिषा (वरुण)
योगआयुष्मान
करणतैतिल
चंद्र राशिकुंभ
सूर्य राशिमिथुन
🌅 सूर्योदय05:46 AM
🌇 सूर्यास्त07:17 PM

🪐 ग्रह दशा5 जुलाई 2026

☀️सूर्यमिथुन18.8°
🌙चंद्रकुंभ15°
मंगलमेष4.7°
बुधधनु8.4°
गुरुकर्क4.6°
शुक्रतुला8.8°
शनिमीन19.4°
राहुकुंभ8.2°
केतुसिंह8.2°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को रविवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌘

🌙 आज की तिथि का महत्व

पंचमी · कृष्ण पक्ष

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व्रत / पर्व: नागपंचमी (श्रावण)

कृष्ण पंचमी नाग पूजा के लिए शुभ है। नागों की पूजा से घर में सुख-शांति और कुल की रक्षा होती है।

✅ आज क्या करें

नाग पूजा, दूध का अर्पण, शांतिपाठ

⚠️ आज से बचें

जमीन खोदना, सांप को हानि

⭐ आज का नक्षत्र: शतभिषा

देवता: वरुण

शतभिषा रहस्य और उपचार का नक्षत्र है। ध्यान, साधना और चिकित्सा के लिए उत्तम।

✅ आज क्या करें

चिकित्सा, अनुसंधान, एकांत साधना

⚠️ आज से बचें

सामाजिक समारोह

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

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१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: पंचमी (कृष्ण पक्ष)
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२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: रविवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: शतभिषा
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: आयुष्मान
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५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: तैतिल

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न