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4 जुलाई 2026 का पंचांग - तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल

चतुर्थी | कृष्ण पक्ष | ज्येष्ठ

🌙
तिथि
चतुर्थी
नक्षत्र
धनिष्ठा
🌿
योग
प्रीति
📿
करण
बालव
शहर चुनें:
🌅 05:45 AM   🌇 07:17 PM

📅 पंचांग4 जुलाई 2026

तिथिचतुर्थी (कृष्ण पक्ष)
मासज्येष्ठ (वि.सं. 2083)
वारशनिवार
नक्षत्रधनिष्ठा (अष्टवसु)
योगप्रीति
करणबालव
चंद्र राशिकुंभ
सूर्य राशिमिथुन
🌅 सूर्योदय05:45 AM
🌇 सूर्यास्त07:17 PM

🪐 ग्रह दशा4 जुलाई 2026

☀️सूर्यमिथुन17.9°
🌙चंद्रकुंभ2.5°
मंगलमेष4.1°
बुधधनु4.3°
गुरुकर्क4.5°
शुक्रतुला7.2°
शनिमीन19.3°
राहुकुंभ8.2°
केतुसिंह8.2°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌗

🌙 आज की तिथि का महत्व

चतुर्थी · कृष्ण पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: संकष्टी चतुर्थी व्रत (चंद्र दर्शन के साथ)

कृष्ण चतुर्थी में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है। रात को चंद्रमा के दर्शन करने के बाद व्रत तोड़ा जाता है।

✅ आज क्या करें

गणेश पूजा, रात को चंद्र दर्शन, मोदक भोग

⚠️ आज से बचें

क्रोध, असत्य वचन

⭐ आज का नक्षत्र: धनिष्ठा

देवता: अष्टवसु

धनिष्ठा धन और संगीत का नक्षत्र है। संगीत और व्यापार के कार्य विशेष शुभ।

✅ आज क्या करें

संगीत, धन संचय, व्यापार

⚠️ आज से बचें

विवाह (कुछ मतों में)

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

🌙
१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: चतुर्थी (कृष्ण पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: शनिवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: धनिष्ठा
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: प्रीति
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: बालव

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न