Mokshada Ekadashi | मोक्षदा एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026 | TilakKathayein
एकादशी व्रत कथा

Mokshada Ekadashi | मोक्षदा एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026

Tilak Kathayein19 May 202658 views📖 1 min read
मोक्षदा एकादशी – Mokshada Ekadashi
मोक्षदा एकादशी 2026 – व्रत कथा, विधि, क्या खाएं, शुभ मुहूर्त और लाभ। भगवान विष्णु की कृपा पाएं।

मोक्षदा एकादशी – परिचय

मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। 2026 में यह एकादशी 15 दिसंबर, मंगलवार को पड़ेगी। इस एकादशी को 'मोक्षदा' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह एकादशी समस्त पापों का नाश कर मोक्ष प्रदान करने वाली है। इसे 'वैकुंठ एकादशी' भी कहते हैं क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु का वैकुंठ लोक में आगमन माना जाता है।

सभी एकादशियों में मोक्षदा एकादशी का विशेष स्थान है, इसे 'सर्वश्रेष्ठ एकादशी' के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को जन्म-जन्मांतर के कष्टों से मुक्ति मिलती है और सीधे वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। यह पितरों को भी मुक्ति दिलाने वाली एकादशी है।

मोक्षदा एकादशी की व्रत कथा

प्राचीन काल में महिष्मति नामक एक नगर था, जहाँ राजा महीजित राज्य करते थे। राजा के पिता की मृत्यु हो चुकी थी और वे प्रेत योनि में कष्ट भोग रहे थे। राजा महीजित को यह बात एक संत से पता चली, जो उनके पिता के पास से आए थे। राजा अपने पिता को इस कष्ट से मुक्त कराना चाहते थे।

तब राजा ने महर्षि मार्कंडेय से इस कष्ट निवारण का उपाय पूछा। महर्षि ने उन्हें मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की 'मोक्षदा एकादशी' का व्रत करने का विधान बताया। राजा ने अत्यंत श्रद्धापूर्वक विधि-विधान से इस एकादशी का व्रत किया और उसका पुण्य अपने पिता को समर्पित कर दिया।

जैसे ही राजा ने व्रत का पुण्य अपने पिता को दिया, उनके पिता को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई और वे स्वर्गलोक को प्राप्त हुए। इस प्रकार, मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से न केवल स्वयं को बल्कि अपने पितरों को भी मुक्ति दिलाई जा सकती है।

व्रत विधि

दशमी की रात्रि से ही व्रत की तैयारी शुरू हो जाती है। इस रात सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। रात में जमिनी पर सोएं और प्रभु का स्मरण करते रहें।

एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र की स्थापना करें और पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजा करें। तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करते रहें।

समयकरने का कार्य
प्रातःकालब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें।
सूर्य उदय के पश्चातभगवान विष्णु की पूजा करें, मंत्र जाप करें।
दिन भरफलाहार करें, अन्न का सेवन न करें। मन को शांत रखें।
संध्याकालभगवान विष्णु की आरती करें, भजन-कीर्तन करें।
रात्रि मेंजागरन करें या प्रभु का स्मरण करते हुए सोएं।

द्वादशी के दिन, शुभ मुहूर्त देखकर व्रत का पारण करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और यथाशक्ति दान-दक्षिणा दें। इसके पश्चात स्वयं सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत खोलें।

व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं

मोक्षदा एकादशी के व्रत में फलाहार का विधान है। आप फल, दूध, दही, मक्खन, पनीर, मेवे (बादाम, काजू, पिस्ता), सिंघाड़ा, कूटू का आटा (पूरी, पकौड़ी), साबूदाना (खिचड़ी, खीर) आदि का सेवन कर सकते हैं। ये सभी वस्तुएं सात्विक और व्रत के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।

इस व्रत में चावल का सेवन पूर्णतः वर्जित है। इसके अतिरिक्त, समस्त प्रकार की दालें, बैंगन, लौकी, तोरई, मसूर, राई, लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन का त्याग करना चाहिए। चावल वर्जित होने का कारण यह है कि ऐसी मान्यता है कि चावल में जल तत्व की अधिकता होती है, जो एकादशी के व्रत के नियम के विरुद्ध है।

मोक्षदा एकादशी व्रत के लाभ

  • पाप-मोचन – इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के समस्त पूर्वार्जित पाप नष्ट हो जाते हैं। पुराणों के अनुसार, यह व्रत मनुष्य को ब्रह्महत्या जैसे महापापों से भी मुक्ति दिलाता है।
  • मोक्ष प्राप्ति – इस एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को मृत्यु के पश्चात सीधे वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है और वह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है।
  • सांसारिक लाभ – यह व्रत धारण करने वाले को जीवन में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
  • स्वास्थ्य लाभ – उपवास रखने से शरीर की पाचन क्रिया को आराम मिलता है, जिससे शरीर शुद्ध होता है और स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह एक प्रकार का प्राकृतिक डिटॉक्स है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में मोक्षदा एकादशी कब है?

2026 में मोक्षदा एकादशी 15 दिसंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन का शुभ मुहूर्त 15 दिसंबर की सुबह 05:39 से 16 दिसंबर की सुबह 06:12 तक रहेगा।

मोक्षदा एकादशी व्रत में चावल क्यों नहीं खाते?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चावल को जल तत्व का प्रतीक माना जाता है और एकादशी को जल तत्व का सेवन वर्जित है। कुछ कथाओं के अनुसार, चावल भगवान विष्णु का प्रिय अन्न नहीं है, इसलिए एकादशी को इसका त्याग करना चाहिए।

क्या बीमार व्यक्ति मोक्षदा एकादशी व्रत रख सकता है?

बीमार, गर्भवती महिलाएं, या वृद्ध जन यदि पूर्ण उपवास रखने में असमर्थ हैं, तो वे फलाहार या एक समय के भोजन का विकल्प चुन सकते हैं। वे केवल एक बार जल या फल ग्रहण कर भी व्रत का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष

मोक्षदा एकादशी का आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय है। यह वह पावन अवसर है जब भगवान विष्णु अपने भक्तों को जन्म-जन्मांतर के बंधनों से मुक्त कर मोक्ष का द्वार खोलते हैं। इस एकादशी के दिन सच्चे मन से व्रत रखने वाले को भगवान विष्णु अपरिमित पुण्य और वैकुंठ धाम का वरदान देते हैं। इसी कारण इसे सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

हे भक्तजनों, पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ मोक्षदा एकादशी का व्रत करें और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करें। यह व्रत आपके जीवन को पवित्र और धन्य बनाएगा। जय श्री हरि! जय एकादशी माता!

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