देवी की कथाएँ

मंगला गौरी कथा – अध्याय 1: शिव की परीक्षा का आरंभ

Tilak Kathayein13 Apr 2026139 views📖 1 min read
मंगला गौरी कथा
मंगला गौरी कथा का अध्याय 1 — शिव की परीक्षा का आरंभ। एक धनी व्यापारी की पत्नी मंगला गौरी की भक्ति करती है, जिससे भगवान शिव उसकी परीक्षा लेने का निर्णय लेते हैं।

शिव की परीक्षा का आरंभ

कैलाश पर्वत पर माँ पार्वती और भगवान शिव विराजमान थे। देवी पार्वती ने अनेक भक्तों की मंगला गौरी के प्रति अटूट श्रद्धा की कहानियाँ भगवान शिव को सुनाईं। भगवान शिव, अपने भक्तों के प्रेम और भक्ति की गहराई मापने के लिए सदैव उत्सुक रहते थे, इसलिए उन्होंने एक भक्त की परीक्षा लेने का निश्चय किया।

एक समृद्ध नगर

किसी समय, एक अत्यंत समृद्ध नगर था, जहाँ हर प्रकार की सुख-सुविधा उपलब्ध थी। उस नगर में धनपाल नामक एक व्यापारी रहता था। वह अपार संपत्ति का स्वामी था, उसका व्यापार दूर-दूर तक फैला हुआ था। धनपाल का घर सोने-चांदी से भरा रहता था, नौकर-चाकरों की कोई कमी नहीं थी, और जीवन में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं था। धनपाल की पत्नी, विमला, एक अत्यंत धार्मिक और सुशील स्त्री थी। उसका हृदय दया और प्रेम से भरा हुआ था। वह सदैव गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करने के लिए तत्पर रहती थी।

विमला मन ही मन सोचती, "इतना वैभव, इतनी समृद्धि किस काम की, यदि हृदय में ईश्वर के प्रति प्रेम न हो? भगवान ने हमें सब कुछ दिया है, इसलिए हमें भी अपनी श्रद्धा और भक्ति से उन्हें धन्यवाद देना चाहिए।" वह प्रतिदिन सुबह उठकर स्नान करती और फिर मंगला गौरी की पूजा करती थी।

मंगला गौरी की आराधना

विमला ने पूरे विधि-विधान से मंगला गौरी का व्रत रखा। उसने सोलह सोमवार तक नियमित रूप से मंगला गौरी की पूजा की। उसने गौरी माँ को फल, फूल, और मिष्ठान अर्पित किए। उसने गरीबों को दान दिया और ब्राह्मणों को भोजन कराया। उसकी भक्ति और श्रद्धा देखकर नगर के लोग भी विस्मित थे। मंगला गौरी के प्रति उसकी अटूट निष्ठा ने उसे नगर में अत्यंत लोकप्रिय बना दिया। वह हर समय मंगला गौरी का ध्यान करती और उनसे अपने परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती रहती थी। उसकी प्रार्थना में इतनी शक्ति थी कि पूरे नगर में सुख-शांति बनी रहती थी।

विमला ने पूजा करते हुए प्रार्थना की, "हे माँ गौरी, मुझ पर और मेरे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखना। हमारे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे और हम सदैव आपकी भक्ति में लीन रहें।" उसे पूर्ण विश्वास था कि मंगला गौरी उसकी प्रार्थना अवश्य सुनेंगी।

परीक्षा का विचार

उधर, कैलाश पर्वत पर भगवान शिव देवी पार्वती से बोले, "हे देवी, यह विमला मेरी भक्त है, उसकी भक्ति में कोई संदेह नहीं है, लेकिन मैं उसकी परीक्षा लेना चाहता हूँ। मैं देखना चाहता हूँ कि वह सुख-समृद्धि में रहकर भी अपनी भक्ति में कितनी दृढ़ है।" देवी पार्वती ने कहा, "हे प्रभु, आप सर्वज्ञ हैं। आपकी इच्छा ही सर्वोपरि है।" भगवान शिव ने विमला की परीक्षा लेने की योजना बनाई। उन्होंने अपने एक गण को व्यापारी के नगर में जाकर कुछ ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न करने का आदेश दिया जिससे विमला की भक्ति और धैर्य की परीक्षा हो सके। अब देखना यह है कि विमला इस परीक्षा में खरी उतरती है या नहीं। अगला अध्याय कठिनाइयों और भक्ति पर केंद्रित होगा।

अध्याय 1 का सार: इस अध्याय में, हमने एक धनी व्यापारी और उसकी पत्नी विमला के बारे में जाना, जो मंगला गौरी की भक्त थी। भगवान शिव ने विमला की भक्ति की परीक्षा लेने का निश्चय किया, जिससे पता चलता है कि सच्ची भक्ति का मार्ग कठिनाइयों से भरा होता है और भक्त को हर परिस्थिति में ईश्वर पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।

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आज का पंचांग 29 अगस्त 2026

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