आरती

Kuber Ji Ki Aarti | कुबेर जी की आरती – बोल, विधि और महत्व

Tilak Kathayein11 Apr 2026125 views📖 1 min read
कुबेर जी की आरती – Kuber Ji Ki Aarti
कुबेर जी की आरती – सम्पूर्ण आरती बोल, अर्थ और आरती करने की विधि। कुबेर की आरती हिंदी में।

कुबेर जी की आरती – परिचय

कुबेर जी की आरती भगवान कुबेर को समर्पित एक भक्तिमय स्तुति है। यह आरती धन और समृद्धि के देवता कुबेर को प्रसन्न करने के लिए गाई जाती है। यह आमतौर पर कुबेर पूजा के दौरान या किसी शुभ अवसर पर गाई जाती है। इस आरती की रचना संभवतः प्राचीन काल में किसी अज्ञात भक्त द्वारा की गई थी।

हिंदू पूजा पद्धति में आरती का विशेष महत्व है, यह भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करने का एक माध्यम है। कुबेर जी की आरती धन और समृद्धि की प्राप्ति के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह आरती भक्तों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने और उनके जीवन में खुशहाली लाने में सहायक होती है।

कुबेर जी की आरती के बोल

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जय यक्ष कुबेर हरे।
शरण तुम्हारी आऊँ मैं,
भक्त जनों के तुम तारे॥

तुम हो धन के देवता,
भंडार तुम्हारे भरे।
स्वर्ण सिंहासन बैठे हो,
मणि मुकुट सिर धरे॥

तुम हो अष्ट निधि के दाता,
कृपा तुम्हारी अपरम्परे।
ऋद्धि सिद्धि संग विराजे,
देवों के तुम प्यारे॥

यक्षों के तुम राजा हो,
देवों के तुम प्यारे।
इन्द्र भी तुमको पूजे,
शक्ति तुम्हारी न्यारे॥

जो कोई तुमको ध्यावे,
कष्ट क्लेश सब हरे।
मनवांछित फल पावे,
सुख संपत्ति से भरे॥

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जय यक्ष कुबेर हरे।
शरण तुम्हारी आऊँ मैं,
भक्त जनों के तुम तारे॥

आरती का अर्थ

पहले अंतरे का शब्दार्थ है कि हे यक्ष कुबेर स्वामी आपकी जय हो, मैं आपकी शरण में आता हूँ क्योंकि आप अपने भक्तों के तारे हैं, अर्थात उनका उद्धार करने वाले हैं। इस पंक्ति में कुबेर जी को भक्तों का रक्षक और उद्धारक बताया गया है।

आरती का मुख्य भाव भगवान कुबेर की महिमा का वर्णन करते हुए उनसे धन, समृद्धि, सुख और शांति की प्रार्थना करना है। भक्त कुबेर जी से अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने और कष्टों को दूर करने की विनती करते हैं। कुबेर जी को धन का देवता मानते हुए उनसे अपने भंडार भरने की प्रार्थना करते हैं।

आरती करने की विधि

आरती की थाली में दीपक, कपूर, घी, फूल, धूप, अक्षत (चावल) और कुमकुम रखें। दीपक घी का होना चाहिए और उसमें रूई की बत्ती जलाएं।

आरती को भगवान कुबेर की मूर्ति या चित्र के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएं। आमतौर पर आरती को चार बार चरणों पर, दो बार नाभि पर और एक बार मुख पर घुमाया जाता है। आरती घुमाते समय कुबेर जी के मंत्रों का जाप करें या आरती के बोल गाएं।

कुबेर की आरती आमतौर पर संध्या आरती के समय करना शुभ माना जाता है, लेकिन इसे किसी भी समय किया जा सकता है। विशेष अवसरों पर या कुबेर पूजा के दौरान भी आरती की जाती है।

आरती के लाभ

  • कुबेर की कृपा – कुबेर जी की आरती करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और धन-धान्य में वृद्धि होती है। यह आरती भक्तों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने में सहायक होती है।
  • घर में सुख-शांति – नियमित रूप से कुबेर जी की आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-शांति बनी रहती है। इससे घर का वातावरण शांत और खुशहाल रहता है।
  • मनोकामना पूर्ति – कुबेर जी की आरती श्रद्धापूर्वक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें जीवन में सफलता मिलती है। यह आरती भक्तों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है।

निष्कर्ष

कुबेर जी की आरती का दिव्य महत्व है। लाखों भक्तों द्वारा यह आरती श्रद्धापूर्वक गाई जाती है। इसका पवित्र उद्गम और कुबेर पूजा की परंपरा में इसका विशेष स्थान है। यह आरती धन और समृद्धि के देवता कुबेर के प्रति प्रेम और भक्ति व्यक्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।

सभी भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे प्रतिदिन पूर्ण भक्ति के साथ इस आरती का गायन करें। जय कुबेर!

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आज का पंचांग 29 अगस्त 2026

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