भजन

Jai Ganesh Jai Ganesh Deva | जय गणेश जय गणेश देवा – बोल, अर्थ और महत्व

Tilak Kathayein11 Apr 2026177 views📖 1 min read
जय गणेश जय गणेश देवा – Jai Ganesh Jai Ganesh Deva
जय गणेश जय गणेश देवा – सम्पूर्ण भजन बोल, हिंदी अर्थ और गणेश की महिमा। भक्ति संगीत।

जय गणेश जय गणेश देवा – परिचय

जय गणेश जय गणेश देवा एक प्रसिद्ध और अत्यंत लोकप्रिय गणेश भजन है। यह भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता के रूप में जाना जाता है। माना जाता है कि इस भजन की रचना 20वीं शताब्दी में हुई थी और यह तब से ही गणेश भक्तों के बीच बहुत प्रचलित है।

हिंदी भक्ति संगीत में इस भजन का एक विशेष स्थान है। यह भजन गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों पर विशेष रूप से गाया जाता है और इसे भारत के हर कोने में सुना जा सकता है।

जय गणेश जय गणेश देवा के बोल (Lyrics)

जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी,
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी।
जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा।
जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुत वारी,
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी।
जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

भजन का अर्थ

मुखड़े का अर्थ है: "हे गणेश, हे गणेश, हे देवा! जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव हैं।" यह भगवान गणेश के माता-पिता के बारे में बताता है और उनकी स्तुति करता है। भावार्थ यह है कि हम भगवान गणेश को नमन करते हैं, जो सर्वोच्च शक्ति के पुत्र हैं।

पहले अंतरे का भावार्थ यह है कि भगवान गणेश एकदंत हैं, दयालु हैं, चार भुजाओं वाले हैं, उनके माथे पर सिंदूर शोभायमान है और मूषक उनकी सवारी है। यह गणेश जी के स्वरूप और महिमा का वर्णन करता है।

भजन का समग्र संदेश यह है कि भक्त भगवान गणेश की शरण में जाकर अपने दुखों को दूर कर सकते हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। भक्त भगवान गणेश के प्रति अपनी श्रद्धा और प्रेम व्यक्त करता है।

भजन का इतिहास

यद्यपि "जय गणेश जय गणेश देवा" के निश्चित रचयिता के बारे में जानकारी दुर्लभ है, यह भजन पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक रूप से प्रसारित होता रहा है। यह भजन भारतीय भक्ति परंपरा का अभिन्न अंग बन गया है।

यह भजन गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी और अन्य गणेश पूजा अवसरों पर मंदिरों में, घरों में और सार्वजनिक समारोहों में गाया जाता है। यह भगवान गणेश के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रार्थना है।

भजन के लाभ

  • आध्यात्मिक लाभ – यह भजन भगवान गणेश के साथ गहरा संबंध स्थापित करने में मदद करता है। इसके नियमित गायन से आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है।
  • मानसिक लाभ – यह भजन मन को शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है। यह तनाव और चिंता को कम करने में सहायक है।
  • भक्ति का विकास – इस भजन का नियमित गायन हृदय में भक्ति और प्रेम की भावना को बढ़ाता है। यह भगवान गणेश के प्रति समर्पण को प्रोत्साहित करता है।

निष्कर्ष

जय गणेश जय गणेश देवा गणेश के लिए सबसे महान भक्ति रचनाओं में से एक है क्योंकि इसकी संगीत सुंदरता, यह जो भावना पैदा करती है, और क्यों पीढ़ियों से भक्तों ने इसे पसंद किया है। इसकी सरल और मधुर धुन हर किसी को आकर्षित करती है। यह भजन भगवान गणेश के प्रति प्रेम और भक्ति की अभिव्यक्ति है।

भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे इस भजन को प्रतिदिन प्रेम से गाएं। जय गणेश!

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आज का पंचांग 29 अगस्त 2026

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