कालिया नाग दमन कथा – अध्याय 3: यमुना में छलांग | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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कालिया नाग दमन कथा – अध्याय 3: यमुना में छलांग

Tilak Kathayein12 Apr 202661 views📖 1 min read
कालिया नाग दमन कथा
कालिया नाग दमन कथा का अध्याय 3 — यमुना में छलांग। कृष्ण यमुना नदी में कूदते हैं और कालिया नाग के साथ युद्ध करने के लिए आगे बढ़ते हैं।

यमुना में छलांग

पिछले अध्याय में हमने देखा कि कैसे कालिया नाग के विष से यमुना नदी दूषित हो गई थी, और ब्रजवासी त्रस्त थे। कृष्ण, जो अपनी लीला दिखा रहे थे, ने अब इस संकट को दूर करने का निश्चय किया। यमुना का विष ब्रजवासियों के लिए काल बन गया था, और केवल कृष्ण ही इस काल को रोकने की शक्ति रखते थे।

विषाक्त जल में आह्वान

यमुना किनारे हाहाकार मचा था। गोपियाँ अपने बच्चों को लेकर रो रही थीं, गायें प्यास से व्याकुल थीं, और व्रजभूमि मुरझा रही थी। सूर्य की किरणें यमुना के विषैले जल पर पड़कर और भी भयावह लग रही थीं। कृष्ण ने सबकी आँखों में निराशा देखी और उनका हृदय करुणा से भर गया। उन्होंने मन ही मन निश्चय किया कि आज इस यमुना को फिर से निर्मल करना है, ब्रजवासियों के कंठों को फिर से तृप्त करना है।

कृष्ण ने बलराम की ओर देखा और मंद मुस्कान के साथ कहा, "बलराम भैया, देखो तो, यमुना मैया कितनी दुखी हैं। हमें उनकी पीड़ा हरनी होगी। मैं अभी जाकर उन्हें मुक्त करता हूँ।" बलराम समझ गए कि कृष्ण क्या करने वाले हैं, उन्होंने बस सिर हिलाकर सहमति दी। कृष्ण के नेत्रों में एक दिव्य तेज था, जैसे वह कालिया नाग को चुनौती दे रहे हों।

कालिया नाग का क्रोध

कृष्ण ने बिना किसी भय के कदम्ब के ऊँचे वृक्ष पर चढ़कर अपनी बांसुरी बजाई। बांसुरी की मधुर ध्वनि जैसे यमुना के विषैले जल को चुनौती दे रही थी। फिर, एक छलांग! कृष्ण यमुना में कूद गए। उनका शरीर नीले रंग में चमक रहा था, मानो साक्षात नारायण ही यमुना में उतरे हों। जल में गिरते ही एक भयंकर गर्जना सुनाई दी। कालिया नाग क्रोध से फुफकार उठा।

यमुना का पानी उबलने लगा, लहरें ऊँची उठने लगीं। कालिया नाग अपने पाँच फनों को फैलाकर प्रकट हुआ, उसकी आँखें क्रोध से लाल थीं। उसने कृष्ण को ललकारा, "कौन है तू, जो मेरे राज्य में घुसने का साहस कर रहा है? क्या तू नहीं जानता कि मैं कालिया हूँ, नागों का राजा? तेरा काल आ गया है!" कृष्ण ने हंसते हुए उत्तर दिया, "मैं तो बस यमुना मैया की सेवा करने आया हूँ, कालिया। तुम व्यर्थ ही क्रोधित हो रहे हो।"

भयंकर युद्ध का आरम्भ

कालिया नाग ने फुंकारते हुए कृष्ण पर विष की वर्षा करनी शुरू कर दी। कृष्ण ने अपनी लीला से उस विष को निष्क्रिय कर दिया। फिर, कालिया ने अपने फनों से कृष्ण पर आक्रमण किया। कृष्ण ने बड़ी ही आसानी से उसके वारों को विफल कर दिया। दोनों के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया। यमुना का जल रक्त रंजित हो गया, लहरें ऊँची उठकर जैसे आकाश को छूने लगीं। ब्रजवासी किनारे पर खड़े डर से कांप रहे थे, पर उन्हें कृष्ण पर पूरा विश्वास था। वे जानते थे कि कृष्ण ही इस संकट से उन्हें उबार सकते हैं। अगले अध्याय में हम देखेंगे कि कैसे कृष्ण, कालिया नाग को नृत्य करने पर विवश करते हैं।

अध्याय 3 का सार: कृष्ण यमुना के विषैले जल में कूदते हैं, कालिया नाग क्रोधित होता है, और दोनों के बीच भयंकर युद्ध आरम्भ होता है। इस अध्याय में कृष्ण का निडर और करुणामय स्वभाव प्रकट होता है, साथ ही यह संदेश भी मिलता है कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

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