
Ambernath Shiv Mandir | अंबरनाथ शिव मंदिर
अंबरनाथ शिव मंदिर एक प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर है, जहाँ दर्शन का समय सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक है; मुंबई से रेल द्वारा आसानी से पहुँचें और शिवरात्रि पर इसका विशेष महत्व है।
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अंबरनाथ शिव मंदिर एक प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर है, जहाँ दर्शन का समय सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक है; मुंबई से रेल द्वारा आसानी से पहुँचें और शिवरात्रि पर इसका विशेष महत्व है।

नीलकंठ महादेव मंदिर पौराणिक कथाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है; यहाँ दर्शन का समय सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक है, जो ऋषिकेश से 32 कि.मी. दूर स्थित है और सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और हिंदू धर्म में इसका गहरा आध्यात्मिक महत्व है।

शिव पुराण का अध्याय 7 — शिव से मोक्ष प्राप्ति का मार्ग। यह अध्याय शिव भक्ति के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करने के मार्ग और शिव पुराण के श्रवण के फल का वर्णन करता है।

शिव पुराण का अध्याय 6 — लिंगम और शिव पूजा का महत्व। यह अध्याय लिंगम के महत्व और शिव की पूजा विधि के बारे में विस्तार से बताता है।

शिव पुराण का अध्याय 5 — शिव और उनके गणों की कथा। यह अध्याय शिव के गणों, जैसे नंदी, वीरभद्र, और भैरव, और उनके पराक्रम की कहानियों का संग्रह है।

शिव पुराण का अध्याय 4 — शिव की शक्तियों की कथाएँ। यह अध्याय शिव की विभिन्न शक्तियों और उनके अद्भुत कार्यों से संबंधित कहानियों का वर्णन करता है।

शिव पुराण का अध्याय 3 — पार्वती और शिव का विवाह। यह अध्याय पार्वती की घोर तपस्या और शिव के साथ उनके विवाह की दिव्य कथा का वर्णन करता है।

शिव पुराण का अध्याय 2 — सती का बलिदान और पुनर्जन्म। यह अध्याय सती के दक्ष प्रजापति के यज्ञ कुण्ड में आत्मदाह करने और पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लेने की कथा कहता है।

शिव पुराण का अध्याय 1 — शिव का उद्भव और महिमा। यह अध्याय शिव के निराकार ब्रह्म से साकार रूप में प्रकट होने और उनकी महिमा का वर्णन करता है।

दुर्वासा मुनि कथा का अध्याय 5 — सीख और महत्व। यह अध्याय दुर्वासा मुनि की कथा से मिलने वाली शिक्षाओं, उनके क्रोध के पीछे के कारण, और उनके चरित्र के महत्व का वर्णन करता है।

दुर्वासा मुनि कथा का अध्याय 4 — शकुंतला का दुर्भाग्य। यह अध्याय शकुंतला को दुर्वासा मुनि द्वारा दिए गए शाप की कहानी बताता है, जिसके कारण दुष्यंत उसे भूल जाते हैं।

दुर्वासा मुनि कथा का अध्याय 3 — अम्बरीष और विष्णु कृपा। दुर्वासा मुनि अम्बरीष राजा को शाप देने का प्रयास करते हैं, किन्तु विष्णु की कृपा से असफल हो जाते हैं और उन्हें विष्णु के सुदर्शन चक्र का पीछा करना पड़ता है।