
महाभारत – अध्याय 3: कृष्ण का मथुरा प्रस्थान
महाभारत का अध्याय 3 — कृष्ण का मथुरा प्रस्थान। अक्रूर के साथ कृष्ण का मथुरा प्रस्थान और कंस के अंत की ओर ले जाने वाली घटनाओं का वर्णन इसमें है।
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महाभारत का अध्याय 3 — कृष्ण का मथुरा प्रस्थान। अक्रूर के साथ कृष्ण का मथुरा प्रस्थान और कंस के अंत की ओर ले जाने वाली घटनाओं का वर्णन इसमें है।

भगवद गीता का अध्याय 4 — ज्ञान योग: ज्ञान का मार्ग। कृष्ण ज्ञान के मार्ग, आत्म-साक्षात्कार की प्रकृति और कैसे भक्ति और ज्ञान एक साथ मुक्ति की ओर ले जा सकते हैं, इसका वर्णन करते हैं।

महाभारत का अध्याय 2 — कृष्ण की वृंदावन लीलाएँ। यह अध्याय कृष्ण के वृंदावन में गोपियों के साथ बिताए गए रमणीय समय और उनकी दिव्य लीलाओं का वर्णन करता है।

भगवद गीता का अध्याय 3 — कर्म योग: कर्म का मार्ग। कृष्ण अर्जुन को फल की अपेक्षा किए बिना अपने कर्तव्य को निभाने के महत्व पर जोर देते हैं, इसलिए कर्म योग को निष्काम कर्म की आवश्यकता होती है।

महाभारत का अध्याय 1 — कृष्ण जन्म और प्रारंभिक जीवन। यह अध्याय कृष्ण के जन्म, उनके प्रारंभिक जीवन, और कंस के अत्याचारों से उनकी सुरक्षा पर केंद्रित है।

भगवद गीता का अध्याय 2 — सांख्य योग: सच्चा ज्ञान। कृष्ण शाश्वत आत्मा की प्रकृति, कर्म के परिणामों और ज्ञान के मार्ग की व्याख्या करते हैं, अर्जुन को कर्तव्यपरायणता के बारे में शिक्षित करते हैं।

भगवद गीता का अध्याय 1 — अर्जुन की दुविधा: एक परिचय। अर्जुन कुरुक्षेत्र युद्ध के मैदान में अपने रिश्तेदारों और गुरुओं के विरुद्ध लड़ने के लिए अनिच्छुक हैं, और वह अपने सारथी कृष्ण से मार्गदर्शन मांगते हैं।

गोपिका उद्धार कथा का अध्याय 5 — उद्धार और शाश्वत प्रेम। कृष्ण गोपियों को मोक्ष प्रदान करते हैं, उनके प्रेम को शाश्वत बनाते हैं, और सिखाते हैं कि निस्वार्थ प्रेम ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है।

गोपिका उद्धार कथा का अध्याय 4 — कृष्ण का दिव्य प्राकट्य। कृष्ण अंततः गोपियों के सामने प्रकट होते हैं, अपनी दिव्य उपस्थिति से उनकी पीड़ा को शांत करते हैं और उन्हें रास लीला का आनंद प्रदान करते हैं।

गोपिका उद्धार कथा का अध्याय 3 — प्रिय की खोज। गोपियाँ कृष्ण को पूरे वन में ढूंढती हैं, उनकी लीलाओं का स्मरण करती हैं और उनके वियोग में तड़पती हैं।

गोपिका उद्धार कथा का अध्याय 2 — कृष्ण का वचन और अनुपस्थिति। कृष्ण गोपियों को रास लीला का वचन देते हैं, लेकिन फिर अचानक गायब हो जाते हैं, जिससे गोपियाँ व्याकुल हो जाती हैं।

गोपिका उद्धार कथा का अध्याय 1 — वृन्दावन: प्रेम और विरह। यह अध्याय वृन्दावन और गोपियों का परिचय देता है जो कृष्ण के प्रति प्रेम में डूबी हुई हैं और उनके दर्शन के लिए तरस रही हैं।