
Durga Saptashati Katha – Chapter 9: Blessings and Conclusion
दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 9 — आशीर्वाद और समापन। देवी सुरथ और समाधि को दर्शन देती हैं, उनके मनोरथ पूर्ण करती हैं, और संसार को धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश देती हैं।
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दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 9 — आशीर्वाद और समापन। देवी सुरथ और समाधि को दर्शन देती हैं, उनके मनोरथ पूर्ण करती हैं, और संसार को धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश देती हैं।

दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 8 — शुम्भ-निशुम्भ का वध। देवी दुर्गा शुम्भ और निशुम्भ से युद्ध करती हैं और अंत में उनका वध करके देवताओं को स्वर्ग वापस दिलाती हैं।

दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 7 — रक्तबीज का विनाश। रक्तबीज नामक असुर के रक्त से उत्पन्न होने वाले असुरों से युद्ध करते हुए देवी चिंतित हो जाती हैं, तब वे काली रूप धारण कर रक्तबीज का वध करती हैं।

दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 6 — चण्ड मुण्ड का संहार। शुम्भ और निशुम्भ के आदेश पर चण्ड और मुण्ड नामक असुर देवी दुर्गा पर आक्रमण करते हैं, लेकिन देवी द्वारा उनका संहार कर दिया जाता है।

दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 5 — शुम्भ-निशुम्भ की चुनौती। शुम्भ और निशुम्भ नामक दो शक्तिशाली असुर स्वर्ग पर आक्रमण करते हैं और देवी दुर्गा से युद्ध करने की चुनौती देते हैं।

दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 4 — महिषासुर का अंत। महिषासुर नामक असुर देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लेता है, जिसके बाद सभी देवता मिलकर देवी दुर्गा का आह्वान करते हैं और देवी महिषासुर का वध करती हैं।

दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 3 — मधुकैटभ का वध। भगवान विष्णु की योगनिद्रा से मधु और कैटभ नामक दो राक्षस उत्पन्न होते हैं, जो ब्रह्मा जी को मारने के लिए उद्यत होते हैं, तब देवी महामाया प्रकट होकर उनका वध करती हैं।

दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 2 — देवी माहात्म्य: ज्ञान की खोज। राजा सुरथ और समाधि मुनि से संसार की माया और ज्ञान के बारे में प्रश्न पूछते हैं, जिसके उत्तर में मुनि देवी महात्म्य का वर्णन करते हैं।

दुर्गा सप्तशती कथा का अध्याय 1 — महामाया की महिमा: परिचय। राजा सुरथ और समाधि नामक व्यापारी की कहानी से दुर्गा सप्तशती की महिमा का परिचय होता है, जो अपनी समस्याओं के समाधान के लिए देवी की शरण में जाते हैं।