चामुंडा माता कथा – अध्याय 6: शुंभ-निशुंभ की चुनौती | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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चामुंडा माता कथा – अध्याय 6: शुंभ-निशुंभ की चुनौती

Tilak Kathayein13 Apr 202671 views📖 1 min read
चामुंडा माता कथा
चामुंडा माता कथा का अध्याय 6 — शुंभ-निशुंभ की चुनौती। शुंभ और निशुंभ चामुंडा की शक्ति से ईर्ष्या करते हैं और उसे युद्ध के लिए ललकारते हैं, जिससे एक और भयानक युद्ध की शुरुआत होती है।

शुंभ-निशुंभ की चुनौती

चामुंडा माता की विजय के उत्सव की गूंज अभी शांत ही हुई थी, दैत्यों के लोकों में हाहाकार मच गया था। चंड और मुंड के विनाश की खबर आग की तरह फैली, जिसने शुंभ और निशुंभ के हृदय में क्रोध की ज्वाला भड़का दी। उनकी अजेय सेना का मान मर्दन हो चुका था, और यह अपमान वे कदापि सहन करने को तैयार नहीं थे।

असुरों का आक्रोश

शुंभ के दरबार में सन्नाटा पसरा हुआ था, जिसे उसके क्रोध की भीषण गर्जना ने भंग कर दिया। उसका चेहरा लाल हो गया था, मुट्ठियाँ भींचने से उसकी नसों में उभार आ गया था। निशुंभ, जो आमतौर पर शांत स्वभाव का था, उसकी आँखें भी अंगारे की तरह जल रही थीं। चंड और मुंड की मृत्यु ने उनकी प्रतिष्ठा पर गहरा आघात किया था, और वे उस देवी को सबक सिखाने के लिए व्याकुल थे, जिसने उनके गर्व को चूर-चूर कर दिया था। दैत्यों के विनाश का विचार उनके मन को मथ रहा था, और वे प्रतिशोध की अग्नि में जल रहे थे। उनके शक्तिशाली साम्राज्य पर यह कलंक वे धोना चाहते थे, चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े।

शुंभ ने दहाड़ते हुए कहा, "यह देवी कौन है, जिसने हमारे इतने शक्तिशाली योद्धाओं का वध कर दिया? क्या उसकी सामर्थ्य हमसे बढ़कर है? निशुंभ, हमें तत्काल उस देवी का पता लगाना होगा और उसे सबक सिखाना होगा। यह हमारे कुल का अपमान है, जिसे हम कदापि सहन नहीं कर सकते।" निशुंभ ने सहमति में सिर हिलाया और बोला, "भ्राताश्री, आपकी आज्ञा शिरोधार्य है। मैं तत्काल अपनी सेना को तैयार करता हूँ। उस देवी को यहाँ लाकर हम उसके अहंकार को चूर-चूर कर देंगे।"

युद्ध की घोषणा

शुंभ और निशुंभ ने तुरंत ही युद्ध की घोषणा कर दी। उनकी विशाल सेना, जिसमें असंख्य दैत्य और असुर शामिल थे, युद्ध के लिए तैयार हो गई। भयानक अस्त्र-शस्त्रों से लैस, वे देवी के निवास स्थान की ओर चल पड़े। उनके रथों की गड़गड़ाहट और सेना के कोलाहल से पृथ्वी काँपने लगी। आकाश में धूल का गुबार छा गया, जिससे सूर्य की रोशनी भी धुंधली पड़ गई। दैत्यों की क्रूरता और विनाशकारी शक्ति का प्रदर्शन देखकर देवता भी भयभीत हो गए।

जैसे ही दैत्य सेना हिमालय की ओर बढ़ने लगी, चामुंडा माता अपनी दिव्य शक्ति से सब कुछ जान गईं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "असुरों का अहंकार उन्हें विनाश की ओर ले जा रहा है। धर्म की रक्षा और पापियों का नाश ही मेरा उद्देश्य है। इस युद्ध में, सत्य की विजय निश्चित है। मेरे भक्तों को कोई भय नहीं होना चाहिए, क्योंकि मैं सदैव उनकी रक्षा के लिए तत्पर हूँ।"

दैत्यों का विनाश

चामुंडा माता ने अपनी दिव्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए दैत्यों का संहार करना प्रारंभ कर दिया। उनकी हुंकार से ही असुर भयभीत होकर भागने लगे। माता के अस्त्रों ने पल भर में असंख्य दैत्यों को मौत के घाट उतार दिया। रणभूमि लाशों से पट गई और रक्त की नदियाँ बहने लगीं। शुंभ और निशुंभ क्रोध से अंधे हो गए, लेकिन वे माता की शक्ति के आगे टिक नहीं पाए। चामुंडा माता के प्रचंड रूप को देखकर वे थर-थर कांपने लगे, परंतु अभिमान ने उन्हें पीछे हटने नहीं दिया। उनका पराक्रम क्षीण हो गया और वे जान गए कि उनका अंत निकट है। अंततः, माता ने अपने दिव्य अस्त्रों से शुंभ और निशुंभ का वध कर दिया।

अध्याय 6 का सार: शुंभ और निशुंभ के क्रोध और युद्ध की घोषणा के साथ, चामुंडा माता ने अपनी दिव्य शक्ति से दैत्यों का विनाश किया। यह अध्याय हमें सिखाता है कि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है, और धर्म की रक्षा के लिए भगवती सदैव तत्पर रहती हैं। अब अगले अध्याय में विजय और आशीर्वाद की कथा होगी।

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