26 जुलाई 2026 की तिथि – द्वादशी शुक्ल पक्ष | हिंदू पंचांग - Tilak Kathayein

26 जुलाई 2026 का पंचांग

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26 जुलाई 2026 की तिथिद्वादशी

शुक्ल पक्ष

26 जुलाई 2026रविवारश्रावण मास

आज 26 जुलाई 2026 (रविवार) को द्वादशी, शुक्ल पक्ष है। चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में है, योग इन्द्र और करण बालव है। यह श्रावण मास, विक्रम संवत 2083 की तिथि है।

हिंदू पंचांग में तिथि सबसे महत्वपूर्ण अंग है। व्रत, उपवास, पूजा, मांगलिक कार्य और त्योहार — सब तिथि के अनुसार निर्धारित होते हैं। चंद्रमा और सूर्य के बीच 12 अंश के अंतर को एक तिथि कहते हैं।

महत्वपूर्ण समय

⏳ लोकेशन खोज रहे हैं...

🌙

तिथि प्रारंभ

11:40 AM

🌙

तिथि समाप्ति

02:01 PM

🌅

सूर्योदय

05:39 AM

🌙

चंद्रोदय

02:02 PM

🕉

आज का विशेष मंत्र

द्वादशीवामन भगवान

ॐ नमो भगवते वामनाय नमः

इस मंत्र का 108 बार जाप करें — मन शांत, जीवन में शुभ फल की प्राप्ति होगी

आज का पूरा पंचांग विवरण

🌙
तिथि
द्वादशी (शुक्ल पक्ष)
📅
मास
श्रावण मास
🗓️
संवत्
वि.सं. 2083
📿
वार
रविवार
नक्षत्र
ज्येष्ठा
🌿
योग
इन्द्र
🔁
करण
बालव
🌙
चंद्र राशि
वृश्चिक
☀️
सूर्य राशि
कर्क
🌟
नक्षत्र देवता
इंद्र

🌖 द्वादशी तिथि का महत्व

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अधिष्ठाता देव

भगवान विष्णु (वामन)

द्वादशी भगवान विष्णु के वामन अवतार को समर्पित है। एकादशी व्रत का पारण इसी तिथि में किया जाता है।

🙏 व्रत / पर्व

वैकुंठ द्वादशी, गोविंद द्वादशी, एकादशी पारण

✅ आज क्या करें

व्रत पारण, विष्णु पूजा, ब्राह्मण भोजन, दान

⚠️ आज से बचें

व्रत पारण में देरी करना

📅 26 जुलाई 2026 से 15 दिनों की तिथियां

दिनांकवारतिथि
26 जुलाई 2026चुनारविवार🌖 द्वादशी
27 जुलाई 2026सोमवार🌖 त्रयोदशी
28 जुलाई 2026मंगलवार🌖 चतुर्दशी
29 जुलाई 2026बुधवार🌕 पूर्णिमापूर्णिमा
30 जुलाई 2026गुरुवार🌗 प्रतिपदा
31 जुलाई 2026शुक्रवार🌗 द्वितीया
1 अगस्त 2026शनिवार🌗 तृतीया
2 अगस्त 2026रविवार🌗 चतुर्थीविशेष
3 अगस्त 2026सोमवार🌘 पंचमी
4 अगस्त 2026मंगलवार🌘 षष्ठी
5 अगस्त 2026बुधवार🌘 सप्तमी
6 अगस्त 2026गुरुवार🌘 अष्टमी
7 अगस्त 2026शुक्रवार🌘 नवमी
8 अगस्त 2026शनिवार🌒 दशमी
9 अगस्त 2026रविवार🌒 एकादशीएकादशी

🌙 30 तिथियों का परिचय

☀️ शुक्ल पक्ष (1–15)

🌒1. प्रतिपदा
🌒2. द्वितीया
🌓3. तृतीया
🌓4. चतुर्थी
🌔5. पंचमी
🌔6. षष्ठी
🌔7. सप्तमी
🌕8. अष्टमी
🌕9. नवमी
🌕10. दशमी
🌖11. एकादशी
🌖12. द्वादशीचुना
🌗13. त्रयोदशी
🌘14. चतुर्दशी
🌕15. पूर्णिमा

🌑 कृष्ण पक्ष (1–15)

🌖1. प्रतिपदा
🌗2. द्वितीया
🌗3. तृतीया
🌗4. चतुर्थी
🌘5. पंचमी
🌘6. षष्ठी
🌘7. सप्तमी
🌑8. अष्टमी
🌑9. नवमी
🌑10. दशमी
🌑11. एकादशी
🌒12. द्वादशी
🌒13. त्रयोदशी
🌒14. चतुर्दशी
🌑15. अमावस्या

📖 आज की तिथि के बारे में

🌙 तिथि क्या है?

एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में (चंद्रमा बढ़ता है) और 15 कृष्ण पक्ष में (चंद्रमा घटता है)। शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से पूर्णिमा तक और कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक होता है। प्रत्येक तिथि का अपना स्वामी देवता और विशेष महत्व होता है।

🙏 तिथि देखना क्यों ज़रूरी है?

कोई भी शुभ कार्य — विवाह, गृहप्रवेश, व्रत, मुंडन — सही तिथि पर करने से शुभ फल मिलता है। एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या जैसी तिथियाँ विशेष पुण्यदायी मानी जाती हैं। इसलिए प्रतिदिन की तिथि जानना हर हिंदू के लिए उपयोगी है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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पूरा पंचांग देखें

शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, राशिफल और ग्रह स्थिति की पूरी जानकारी के लिए