14 जुलाई 2026 की तिथि – अमावस्या कृष्ण पक्ष | हिंदू पंचांग - Tilak Kathayein

14 जुलाई 2026 का पंचांग

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14 जुलाई 2026 की तिथिअमावस्या

कृष्ण पक्ष

14 जुलाई 2026मंगलवारआषाढ़ मास

आज 14 जुलाई 2026 (मंगलवार) को अमावस्या, कृष्ण पक्ष है। चंद्रमा पुनर्वसु नक्षत्र में है, योग व्याघात और करण किंस्तुघ्न है। यह आषाढ़ मास, विक्रम संवत 2083 की तिथि है।

हिंदू पंचांग में तिथि सबसे महत्वपूर्ण अंग है। व्रत, उपवास, पूजा, मांगलिक कार्य और त्योहार — सब तिथि के अनुसार निर्धारित होते हैं। चंद्रमा और सूर्य के बीच 12 अंश के अंतर को एक तिथि कहते हैं।

महत्वपूर्ण समय

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🌙

तिथि प्रारंभ

06:49 PM

🌙

तिथि समाप्ति

03:17 PM

🌅

सूर्योदय

05:33 AM

🌙

चंद्रोदय

03:14 AM

🕉

आज का विशेष मंत्र

अमावस्यापितृदेव

ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः

इस मंत्र का 108 बार जाप करें — मन शांत, जीवन में शुभ फल की प्राप्ति होगी

आज का पूरा पंचांग विवरण

🌙
तिथि
अमावस्या (कृष्ण पक्ष)
📅
मास
आषाढ़ मास
🗓️
संवत्
वि.सं. 2083
📿
वार
मंगलवार
नक्षत्र
पुनर्वसु
🌿
योग
व्याघात
🔁
करण
किंस्तुघ्न
🌙
चंद्र राशि
मिथुन
☀️
सूर्य राशि
मिथुन
🌟
नक्षत्र देवता
अदिति

🌑 अमावस्या तिथि का महत्व

🌑

अधिष्ठाता देव

पितृदेव / भगवान शिव

अमावस्या पितरों की तिथि है। इस दिन पितृ तर्पण और श्राद्ध करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है।

🙏 व्रत / पर्व

अमावस्या व्रत, पितृ तर्पण, दर्श अमावस्या

✅ आज क्या करें

पितृ तर्पण, गंगा स्नान, श्राद्ध, दान, शिव पूजा

⚠️ आज से बचें

शुभ कार्यों का आरंभ, विवाह, गृहप्रवेश, मांसाहार

📅 14 जुलाई 2026 से 15 दिनों की तिथियां

दिनांकवारतिथि
14 जुलाई 2026चुनामंगलवार🌑 अमावस्याअमावस्या
15 जुलाई 2026बुधवार🌒 प्रतिपदा
16 जुलाई 2026गुरुवार🌒 द्वितीया
17 जुलाई 2026शुक्रवार🌓 तृतीया
18 जुलाई 2026शनिवार🌔 पंचमी
19 जुलाई 2026रविवार🌔 षष्ठी
20 जुलाई 2026सोमवार🌔 सप्तमी
21 जुलाई 2026मंगलवार🌕 अष्टमी
22 जुलाई 2026बुधवार🌕 नवमी
23 जुलाई 2026गुरुवार🌕 नवमी
24 जुलाई 2026शुक्रवार🌖 दशमी
25 जुलाई 2026शनिवार🌖 एकादशीएकादशी
26 जुलाई 2026रविवार🌖 द्वादशी
27 जुलाई 2026सोमवार🌖 त्रयोदशी
28 जुलाई 2026मंगलवार🌖 चतुर्दशी

🌙 30 तिथियों का परिचय

☀️ शुक्ल पक्ष (1–15)

🌒1. प्रतिपदा
🌒2. द्वितीया
🌓3. तृतीया
🌓4. चतुर्थी
🌔5. पंचमी
🌔6. षष्ठी
🌔7. सप्तमी
🌕8. अष्टमी
🌕9. नवमी
🌕10. दशमी
🌖11. एकादशी
🌖12. द्वादशी
🌗13. त्रयोदशी
🌘14. चतुर्दशी
🌕15. पूर्णिमा

🌑 कृष्ण पक्ष (1–15)

🌖1. प्रतिपदा
🌗2. द्वितीया
🌗3. तृतीया
🌗4. चतुर्थी
🌘5. पंचमी
🌘6. षष्ठी
🌘7. सप्तमी
🌑8. अष्टमी
🌑9. नवमी
🌑10. दशमी
🌑11. एकादशी
🌒12. द्वादशी
🌒13. त्रयोदशी
🌒14. चतुर्दशी
🌑15. अमावस्याचुना

📖 आज की तिथि के बारे में

🌙 तिथि क्या है?

एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में (चंद्रमा बढ़ता है) और 15 कृष्ण पक्ष में (चंद्रमा घटता है)। शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से पूर्णिमा तक और कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक होता है। प्रत्येक तिथि का अपना स्वामी देवता और विशेष महत्व होता है।

🙏 तिथि देखना क्यों ज़रूरी है?

कोई भी शुभ कार्य — विवाह, गृहप्रवेश, व्रत, मुंडन — सही तिथि पर करने से शुभ फल मिलता है। एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या जैसी तिथियाँ विशेष पुण्यदायी मानी जाती हैं। इसलिए प्रतिदिन की तिथि जानना हर हिंदू के लिए उपयोगी है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

🕉

पूरा पंचांग देखें

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