Ugratara Mandir Guwahati | उग्रतारा मंदिर गुवाहाटी 2026 – दर्शन समय, इतिहास, कैसे पहुंचें | संपूर्ण जानकारी

📋 विषय सूची
- उग्रतारा मंदिर गुवाहाटी – परिचय
- इतिहास और पौराणिक कथा
- मंदिर की वास्तुकला
- दर्शन और आरती का समय
- कैसे पहुँचें
- प्रमुख त्योहार और उत्सव
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- निष्कर्ष
उग्रतारा मंदिर गुवाहाटी – परिचय
उग्रतारा मंदिर, गुवाहाटी शहर के पूर्वी भाग में स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यह मंदिर मुख्य रूप से देवी उग्रतारा को समर्पित है, जिन्हें दुर्गा का उग्र रूप माना जाता है। मंदिर का शांत वातावरण और आध्यात्मिक महत्व इसे भक्तों और पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य बनाता है। गुवाहाटी आने वाले श्रद्धालु कामाख्या मंदिर के साथ-साथ उग्रतारा मंदिर के दर्शन करना भी महत्वपूर्ण मानते हैं, क्योंकि यह क्षेत्र की शक्ति परंपरा का अभिन्न अंग है।
इस मंदिर में दर्शन करने से भक्तों को भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है, साथ ही साहस और शक्ति का अनुभव होता है। यहाँ प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु देवी के दर्शन के लिए आते हैं, विशेष रूप से नवरात्रि और अन्य त्योहारों के दौरान भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। माना जाता है कि देवी उग्रतारा अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और उन्हें जीवन में सफलता प्राप्त करने में मदद करती हैं। मंदिर में आने वाले भक्तों को एक विशेष प्रकार की शांति और आध्यात्मिक संतुष्टि का अनुभव होता है।
उग्रतारा मंदिर की अनूठी विशेषता यह है कि यहाँ देवी की कोई मूर्ति स्थापित नहीं है, बल्कि एक कुंड है जिसे देवी का प्रतीक माना जाता है। इस कुंड को लाल कपड़े से ढका जाता है और भक्त इसी कुंड की पूजा करते हैं। यह प्रथा तांत्रिक परंपरा से जुड़ी हुई है और इसे देवी के निराकार स्वरूप की उपासना के रूप में देखा जाता है, जो इसे भारत के अन्य मंदिरों से अलग बनाती है।
इतिहास और पौराणिक कथा
उग्रतारा मंदिर का उल्लेख कालिका पुराण और योगिनी तंत्र जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है, जिससे इसकी ऐतिहासिक महत्ता का पता चलता है। माना जाता है कि यह मंदिर 10वीं शताब्दी के आसपास अस्तित्व में आया था, हालांकि वर्तमान संरचना बाद में बनाई गई थी। प्राचीन काल में, इस मंदिर में तांत्रिक साधना करने वाले साधकों का विशेष महत्व था, जो देवी से शक्ति प्राप्त करने के लिए यहाँ आते थे।
पौराणिक कथा के अनुसार, सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को कई टुकड़ों में विभाजित कर दिया था। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए। माना जाता है कि उग्रतारा मंदिर उस स्थान पर स्थित है जहाँ सती की नाभि गिरी थी, इसलिए यह एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है। इस घटना के बाद, यह स्थान देवी उग्रतारा की उपासना के लिए प्रसिद्ध हो गया।
अहोम राजा शिव सिंह ने 1725 में इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था, जिससे मंदिर को वर्तमान स्वरूप मिला। मंदिर को कई बार क्षति पहुँची, लेकिन स्थानीय लोगों और शासकों ने मिलकर इसे फिर से स्थापित किया। वर्तमान में, मंदिर का प्रबंधन एक स्थानीय ट्रस्ट द्वारा किया जाता है, जो मंदिर की देखभाल और रखरखाव का कार्य करता है।
मंदिर की वास्तुकला
उग्रतारा मंदिर की वास्तुकला असमिया शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें नागर और स्थानीय तत्वों का मिश्रण दिखाई देता है। मंदिर का शिखर लगभग 60 फीट ऊँचा है और यह दूर से ही दिखाई देता है। मंदिर परिसर लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें मुख्य मंदिर के अलावा अन्य छोटे मंदिर और संरचनाएं भी शामिल हैं। मंदिर के निर्माण में मुख्य रूप से ईंटों और पत्थर का उपयोग किया गया है, जो इसे मजबूती प्रदान करते हैं।
गर्भगृह में देवी उग्रतारा का कुंड स्थापित है, जिसे लाल कपड़े से ढका जाता है और भक्त इसी की पूजा करते हैं। सभामंडप में भक्तों के बैठने और प्रार्थना करने की व्यवस्था है, जहाँ दीवारों पर देवी-देवताओं की नक्काशी की गई है। द्वार को फूलों और अन्य सजावटी तत्वों से सजाया गया है, जो मंदिर की सुंदरता को बढ़ाते हैं। गर्भगृह के चारों ओर परिक्रमा मार्ग बना हुआ है, जहाँ भक्त देवी की परिक्रमा करते हैं।
मंदिर परिसर में एक तालाब भी है, जिसे 'जोड़पुखरी' के नाम से जाना जाता है। यह तालाब मंदिर के सौंदर्य को बढ़ाता है और इसे पवित्र माना जाता है। इसके अतिरिक्त, मंदिर में कुछ शिलालेख भी मौजूद हैं, जो इसके इतिहास और महत्व के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। परिसर में एक यज्ञशाला भी है, जहाँ विशेष अवसरों पर यज्ञ और हवन किए जाते हैं।
दर्शन और आरती का समय
उग्रतारा मंदिर गुवाहाटी के दर्शन का समय सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक है। मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है, लेकिन विशेष पूजा और अनुष्ठानों के लिए शुल्क देना होता है। भक्त सुबह से ही देवी के दर्शन के लिए आना शुरू हो जाते हैं, और रात तक यह सिलसिला जारी रहता है। मंदिर में आरती के समय भक्तों की विशेष भीड़ होती है।
| आरती / सेवा | समय | विशेषता |
|---|---|---|
| मंगला आरती | सुबह 6:00 बजे | दिन की शुरुआत में देवी की प्रथम आराधना |
| अभिषेक / पूजा | सुबह 9:00 बजे | देवी का विशेष स्नान और श्रृंगार |
| भोग आरती | दोपहर 12:00 बजे | देवी को विशेष भोग अर्पित किया जाता है |
| संध्या आरती | शाम 6:00 बजे | संध्याकाल में देवी की विशेष आराधना |
| शयन आरती | रात 9:00 बजे | दिन की अंतिम आरती, देवी को शयन के लिए तैयार किया जाता है |
उग्रतारा मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को शालीन और सभ्य वस्त्र पहनने चाहिए। मंदिर परिसर में फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है, इसलिए भक्तों को इसका ध्यान रखना चाहिए। मोबाइल फोन को साइलेंट मोड पर रखना चाहिए और जूते-चप्पल मंदिर के बाहर उतारने होते हैं।
कैसे पहुँचें
🚗 सड़क मार्ग
उग्रतारा मंदिर गुवाहाटी तक सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है। गुवाहाटी शहर से मंदिर की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है। राष्ट्रीय राजमार्ग 27 गुवाहाटी से होकर गुजरता है, जिससे यह अन्य शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। गुवाहाटी से मंदिर तक पहुँचने के लिए बस और टैक्सी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हैं।
🚂 रेल मार्ग
उग्रतारा मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन गुवाहाटी रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर से लगभग 6 किलोमीटर दूर है। रेलवे स्टेशन से मंदिर तक पहुँचने में रिक्शा या टैक्सी से लगभग 20-30 मिनट लगते हैं। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, और यहाँ कई प्रमुख ट्रेनें रुकती हैं।
✈️ वायु मार्ग
उग्रतारा मंदिर का निकटतम हवाई अड्डा लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो मंदिर से लगभग 20 किलोमीटर दूर है। हवाई अड्डे से मंदिर तक पहुँचने में टैक्सी से लगभग 45 मिनट लगते हैं। हवाई अड्डे पर टैक्सी और बस सेवाएं उपलब्ध हैं, जो मंदिर तक पहुँचने में सहायक होती हैं।
प्रमुख त्योहार और उत्सव
- अम्बुबाची मेला – जून – इस त्योहार के दौरान कामाख्या मंदिर के साथ-साथ उग्रतारा मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस समय यहाँ लाखों श्रद्धालु आते हैं, जिससे मंदिर का वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
- दुर्गा पूजा – अक्टूबर – दुर्गा पूजा के दौरान मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस अवसर पर देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है और भक्तों को विशेष प्रसाद वितरित किया जाता है।
- काली पूजा – नवंबर – काली पूजा के दौरान उग्रतारा मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं, क्योंकि देवी उग्रतारा को काली का ही एक रूप माना जाता है। इस दिन मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ होती है और पूरी रात जागरण किया जाता है।
उग्रतारा मंदिर में बैसाख महीने में बिहू उत्सव भी धूमधाम से मनाया जाता है, जो असम का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दौरान मंदिर में पारंपरिक नृत्य और संगीत का आयोजन किया जाता है, जिसमें स्थानीय लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। यह उत्सव धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, जो लोगों को एक साथ जोड़ता है और उन्हें अपनी परंपराओं के प्रति जागरूक करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
उग्रतारा मंदिर गुवाहाटी के दर्शन का समय क्या है?
मंगला आरती सुबह 6:00 बजे होती है और शयन आरती रात 9:00 बजे होती है, जिसके बाद मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं।
उग्रतारा मंदिर गुवाहाटी कहाँ स्थित है?
उग्रतारा मंदिर गुवाहाटी, असम में स्थित है, जो शहर के पूर्वी भाग में है। यह मंदिर जोरापुखुरी तालाब के निकट है और गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
उग्रतारा मंदिर गुवाहाटी जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
उग्रतारा मंदिर गुवाहाटी जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक होता है, जब मौसम सुहावना रहता है। दुर्गा पूजा और काली पूजा के दौरान यहाँ विशेष उत्सव होते हैं, इसलिए इन त्योहारों के समय यात्रा करना भी उत्तम रहता है।
उग्रतारा मंदिर गुवाहाटी में प्रवेश शुल्क कितना है?
उग्रतारा मंदिर गुवाहाटी में प्रवेश निःशुल्क है, किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है। हालांकि, विशेष पूजा और अनुष्ठानों के लिए शुल्क देना होता है, जिसकी जानकारी मंदिर कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।
निष्कर्ष
उग्रतारा मंदिर गुवाहाटी प्रत्येक हिंदू के लिए एक आवश्यक तीर्थस्थल है क्योंकि यह शक्ति और साहस का प्रतीक है। देवी उग्रतारा का निराकार स्वरूप भक्तों को एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है, जो उन्हें भय से मुक्ति और आंतरिक शक्ति की अनुभूति कराता है। यह मंदिर असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है और अन्य मंदिरों से अपनी विशिष्ट परंपराओं के कारण अलग है।
उग्रतारा मंदिर की यात्रा की योजना बना रहे भक्तों को विनम्रता और भक्ति के साथ मंदिर में प्रवेश करना चाहिए। उचित वस्त्र पहनें, मंदिर के नियमों का पालन करें और देवी के प्रति सच्ची श्रद्धा रखें। देवी उग्रतारा की कृपा से आपको सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होगी। जय माँ उग्रतारा!
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