आरती

Sita Ram Ji Ki Aarti | सीता राम जी की आरती – बोल, विधि और महत्व

Tilak Kathayein11 Apr 2026190 views📖 1 min read
सीता राम जी की आरती – Sita Ram Ji Ki Aarti
सीता राम जी की आरती – सम्पूर्ण आरती बोल, अर्थ और आरती करने की विधि। सीता राम की आरती हिंदी में।

सीता राम जी की आरती – परिचय

सीता राम जी की आरती एक भक्तिमय स्तुति है जो भगवान राम और माता सीता के प्रति समर्पित है। यह आरती आमतौर पर पूजा, भजन, या किसी शुभ अवसर पर गाई जाती है। माना जाता है कि इस आरती की रचना संत तुलसीदास ने की थी, जो भगवान राम के अनन्य भक्त थे। यह आरती भगवान राम और सीता के दिव्य प्रेम और महिमा का वर्णन करती है।

हिंदू पूजा पद्धति में आरती का महत्वपूर्ण स्थान है, यह भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करने का एक तरीका है। सीता राम जी की आरती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आदर्श दंपति, राम और सीता के प्रति समर्पित है, जिनकी पूजा से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

सीता राम जी की आरती के बोल

आरती कीजै राम लला की।
बालक रूप सदा सुखदाई॥

जाकी छवि अति अद्भुत देखी।
हृदय बसे जैसे रवि की रेखा॥

चरण कमल से गंगा बहती।
पावन करे जो प्राणी कहती॥

शीश मुकुट कुंडल छवि न्यारी।
देखत बने अद्भुत बलिहारी॥

तन पीताम्बर नयन विशाला।
शोभा सिंधु रूप गुण माला॥

आरती कीजै राम लला की।
बालक रूप सदा सुखदाई॥

सीता सहित राम गुण गाऊं।
प्रेम सहित मैं शीश नवाऊं॥

दीन बन्धु दुख हरण कृपालु।
भक्ति देहु सदा प्रतिपालु॥

आरती कीजै राम लला की।
बालक रूप सदा सुखदाई॥

आरती का अर्थ

पहले अंतरे का शब्दार्थ है: "आरती कीजै राम लला की" यानी राम लला की आरती करते हैं, जो बालक रूप में सदा सुख देने वाले हैं। इसका भावार्थ है कि भगवान राम का बाल रूप अत्यंत मनोहर और सुखदायक है, और उनकी आरती करने से आनंद की प्राप्ति होती है। यह उनकी सरलता और प्रेम को दर्शाता है।

आरती का मुख्य भाव भगवान राम और सीता की महिमा का वर्णन करना और उनसे कृपा की प्रार्थना करना है। भक्त उनसे सुख, शांति, भक्ति और प्रेम की याचना करते हैं। यह आरती भगवान राम के प्रति पूर्ण समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है, जिसमें भक्त उनके दिव्य गुणों का गुणगान करते हैं।

आरती करने की विधि

आरती की थाली में दीपक (घी या तेल का), कपूर, फूल, धूप और कुमकुम रखना चाहिए। कुछ लोग चावल और अन्य शुभ वस्तुएं भी रखते हैं।

आरती घुमाने का सही तरीका है कि पहले भगवान के चरणों में चार बार, नाभि में दो बार, मुख पर एक बार और फिर पूरे शरीर पर सात बार घुमाएं। आरती करते समय "जय सीता राम" या भगवान के नाम का जाप करें।

सीता राम की आरती संध्या आरती के समय करना सबसे उत्तम माना जाता है, लेकिन इसे मंगला आरती या शयन आरती के समय भी किया जा सकता है। किसी भी समय, भक्ति और श्रद्धा महत्वपूर्ण है।

आरती के लाभ

  • सीता राम की कृपा – आरती करने से सीता राम प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। यह माना जाता है कि आरती से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
  • घर में सुख-शांति – नियमित रूप से आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मकता दूर होती है। इससे घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
  • मनोकामना पूर्ति – भक्ति भाव से आरती करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह माना जाता है कि भगवान राम अपने भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं और उनकी इच्छाएं पूरी करते हैं।

निष्कर्ष

सीता राम जी की आरती का दिव्य महत्व है। यह आरती लाखों लोगों द्वारा प्रिय है, इसकी उत्पत्ति पवित्र है, और यह सीता राम की पूजा की परंपरा में विशेष है क्योंकि यह भगवान राम और सीता के अटूट प्रेम और आदर्श जीवन मूल्यों का प्रतीक है। यह भक्ति और समर्पण का एक सुंदर अभिव्यक्ति है।

सभी भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे इस आरती को पूर्ण भक्ति के साथ प्रतिदिन गाएं। जय सीता राम!

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आज का पंचांग 29 अगस्त 2026

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