Shri Ram Stuti | श्री राम स्तुति – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026 | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
चालीसा

Shri Ram Stuti | श्री राम स्तुति – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026

Tilak Kathayein06 Apr 2026173 views📖 1 min read
श्री राम स्तुति – Shri Ram Stuti
श्री राम स्तुति – सम्पूर्ण पाठ, शब्दार्थ, विधि और लाभ। 2026 में श्री राम स्तुति हिंदी में पढ़ें।

श्री राम स्तुति – परिचय

श्री राम स्तुति भगवान राम की महिमा का वर्णन करने वाली एक भक्तिमय रचना है। इसमें चालीस चौपाइयाँ हैं, इसलिए इसे 'चालीसा' भी कहा जाता है। माना जाता है कि इसे १६वीं शताब्दी में संत तुलसीदास ने लिखा था, और यह तब से ही व्यापक रूप से प्रचलित है। यह रामचरितमानस का एक अभिन्न अंग है और राम भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

श्री राम स्तुति का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व अतुलनीय है। यह रामचरितमानस की ग्रंथ-परंपरा से जुड़ी है, जो भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह स्तुति भक्तों के हृदय में भगवान राम के प्रति प्रेम और श्रद्धा का संचार करती है, जिससे उन्हें शांति और आनंद की प्राप्ति होती है।

श्री राम स्तुति – सम्पूर्ण पाठ

श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवनकुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै।।
शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन।।
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्र योजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना।।
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तै काँपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तै हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै।।
अंत काल रघुवर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेई सर्व सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मँह डेरा।।
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

शब्द-अर्थ और भावार्थ

श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। यहाँ 'सरोज रज' का अर्थ है कमल के समान चरणों की धूल, 'मनु मुकुरु' का अर्थ है मन रूपी दर्पण, और 'सुधारि' का अर्थ है सुधारना। इसका भावार्थ है कि गुरु के कमल रूपी चरणों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को साफ करके मैं अपने आप को शुद्ध करता हूँ।

पहली चौपाई, जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।। में हनुमान जी को ज्ञान और गुणों का सागर बताया गया है, जो तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं। दूसरी चौपाई, रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।। में उन्हें राम के दूत और अतुलनीय बल के स्वामी के रूप में वर्णित किया गया है, साथ ही उन्हें अंजनी पुत्र और पवनसुत भी कहा गया है। तीसरी चौपाई, महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। में हनुमान जी को महावीर, पराक्रमी और बजरंगी कहा गया है, जो बुरी बुद्धि को दूर करते हैं और अच्छी बुद्धि वालों के साथ रहते हैं। चौथी चौपाई, कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।। में उनके स्वर्ण रंग, सुंदर वस्त्र, कानों में कुंडल और घुंघराले बालों का वर्णन है। पाँचवीं चौपाई, हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै।। में उनके हाथों में वज्र और ध्वजा और कंधे पर मूँज का जनेऊ सुशोभित होने का वर्णन है।

इस चालीसा में राम की महिमा विशेष रूप से हनुमान जी के माध्यम से वर्णित है। हनुमान जी राम के अनन्य भक्त हैं और उन्होंने राम के कार्यों को सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस चालीसा में हनुमान जी की भक्ति, शक्ति और सेवा भावना का वर्णन करके राम की महिमा को अप्रत्यक्ष रूप से दर्शाया गया है।

पाठ विधि और नियम

श्री राम स्तुति का पाठ करने के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन मंगलवार और शनिवार माने जाते हैं, और समय सुबह या शाम का होता है। आप अपनी इच्छा और आवश्यकता के अनुसार एक, तीन, पाँच या ग्यारह पाठ कर सकते हैं। पाठ करने से पहले स्नान करके पवित्र हो जाएं और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

पाठ से पहले एक दीपक जलाएं, धूप जलाएं और फूल अर्पित करें। एक आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। रामचरितमानस या हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सामने पाठ करना विशेष फलदायी होता है।

श्री राम स्तुति का पाठ रामनवमी, हनुमान जयंती और अन्य राम भक्ति से जुड़े त्योहारों पर विशेष रूप से फलदायी होता है। इसके अतिरिक्त, किसी भी व्रत या विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए भी इसका पाठ किया जा सकता है।

श्री राम स्तुति के लाभ

  • राम की विशेष कृपा – श्री राम स्तुति का पाठ करने से भगवान राम की विशेष कृपा प्राप्त होती है। राम भक्तों पर अपनी दया और आशीर्वाद की वर्षा करते हैं।
  • मनोकामना पूर्ति – इस स्तुति का पाठ करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष से जुड़ी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता लाता है।
  • भय और संकट से रक्षा – श्री राम स्तुति का नियमित पाठ भक्तों को भय और संकटों से बचाता है। यह नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है और जीवन में सुरक्षा की भावना लाता है।
  • मानसिक शांति – नियमित पाठ से मन शांत और स्थिर होता है। यह तनाव, चिंता और अवसाद को कम करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
  • मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति – श्री राम स्तुति का पाठ मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। यह भक्तों को भगवान के करीब लाता है और उन्हें परम आनंद की अनुभूति कराता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

श्री राम स्तुति कितने समय में पढ़ी जाती है?

सामान्यतः श्री राम स्तुति को पढ़ने में लगभग 5 से 10 मिनट लगते हैं। यदि आप प्रत्येक चौपाई का अर्थ समझते हुए और ध्यानपूर्वक पाठ करते हैं, तो इसमें थोड़ा अधिक समय लग सकता है।

क्या महिलाएं श्री राम स्तुति पढ़ सकती हैं?

हाँ, महिलाएं श्री राम स्तुति पढ़ सकती हैं। हिंदू धर्म में भक्ति और प्रार्थना में किसी भी लिंग का कोई प्रतिबंध नहीं है। मासिक धर्म के दौरान भी महिलाएं इसका पाठ कर सकती हैं, हालांकि इस दौरान स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए।

श्री राम स्तुति कितनी बार पढ़नी चाहिए?

आप अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार श्री राम स्तुति को दिन में एक बार या अधिक बार पढ़ सकते हैं। दैनिक रूप से एक बार पढ़ना सामान्य है, लेकिन विशेष अवसरों पर इसे तीन, पाँच या ग्यारह बार भी पढ़ा जा सकता है।

निष्कर्ष

श्री राम स्तुति में गहरी आध्यात्मिक शक्ति निहित है, और यह हिंदू धर्म में सबसे पवित्र प्रार्थनाओं में से एक मानी जाती है। प्राचीन परंपराओं के अनुसार, इसका पाठ अत्यंत प्रभावी है, और दैनिक पाठ एक भक्त के जीवन को पूरी तरह से बदल देता है। यह स्तुति भगवान राम के प्रति प्रेम और भक्ति को जागृत करती है, जिससे जीवन में शांति, आनंद और समृद्धि आती है।

हम आपको हृदय से प्रोत्साहित करते हैं कि श्री राम स्तुति को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाएं। यह आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी और आपको भगवान राम के करीब लाएगी। जय राम!

शेयर करें:

संबंधित लेख

भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व
कथाएँ

भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व

भगवान जगन्नाथ भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप माने जाते हैं और ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

02 Jul 2026161
स्वाहा
ब्लॉग

हवन के दौरान हम "स्वाहा" क्यों कहते हैं? | Why Do we Say " Swaha" during havan?

स्वाहा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण मंत्र है, जो यज्ञ में आहुति की पूर्णता का प्रतीक है। यह देवी स्वधा का एक रूप है और पितरों को तृप्त करने व देवताओं को प्रसन्न करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

28 Jun 2026156
काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व | काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व
ब्लॉग

काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व | काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व

कालभैरव का वाहन कुत्ता है, जो रक्षा और वफादारी का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में, भैरव को शिव का रौद्र रूप और काशी का कोतवाल कहा जाता है, जिनकी पूजा अनिष्ट निवारण और सुरक्षा के लिए की जाती है।

07 Jun 2026120
मंगल दोष
ब्लॉग

What is Mangal Dosha? | मंगल दोष क्या है?

हिंदू धर्म में मंगल दोष का गहन महत्व है, जो विवाह और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है। यह दोष ज्योतिषीय गणना पर आधारित है और इसके निवारण के उपाय भी बताए गए हैं।

02 Jun 2026139
श्री कार्तिकेय चालीसा
चालीसा

श्री कार्तिकेय चालीसा | श्री कार्तिकेय चालीसा

श्री कार्तिकेय चालीसा का सम्पूर्ण पाठ, अर्थ सहित, पढ़ने के लाभ और महत्व को विस्तार से जानें। यह चालीसा भगवान कार्तिकेय की शक्ति, बुद्धि और विजय की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।

01 Jun 2026135