Shiv Tandav Stotram Bhajan | शिव तांडव स्तोत्रम् भजन – बोल, अर्थ और महत्व | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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Shiv Tandav Stotram Bhajan | शिव तांडव स्तोत्रम् भजन – बोल, अर्थ और महत्व

Tilak Kathayein11 Apr 2026105 views📖 1 min read
शिव तांडव स्तोत्रम् भजन – Shiv Tandav Stotram Bhajan
शिव तांडव स्तोत्रम् भजन – सम्पूर्ण भजन बोल, हिंदी अर्थ और शिव की महिमा। भक्ति संगीत।

शिव तांडव स्तोत्रम् भजन – परिचय

शिव तांडव स्तोत्रम् भजन भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है। यह रावण द्वारा रचा गया माना जाता है, जो शिव के परम भक्त थे। यह स्तोत्र सदियों से प्रचलित है और शिव भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है। इस भजन में भगवान शिव के तांडव नृत्य का वर्णन किया गया है, जो शक्ति और विनाश का प्रतीक है।

हिंदी भक्ति संगीत में इस भजन का एक विशेष स्थान है। यह अपनी लय, छंद और भगवान शिव के शक्तिशाली चित्रण के कारण अत्यधिक लोकप्रिय है। इसे मंदिरों, घरों और विभिन्न धार्मिक आयोजनों में गाया जाता है।

शिव तांडव स्तोत्रम् भजन के बोल (Lyrics)

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम॥

जटाकटाहसंभ्रमभ्रमन्निलिंपनिर्झरी
विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम॥

धराधरेन्द्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुर
स्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोदमानमानसे।
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि
क्वचिद्दिगंबरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि॥

लताभुजंगपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा
कदंबकुंकुमद्रव प्रलिप्तदिग्वधूमुखे।
मदांधसिंधुरस्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदमतद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि॥

सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर
प्रसूनधूलिधोरणी विधूसराघ्रिपिठभूः।
भुजंगराजमालया निबद्धजाटजूटक
श्रिये चिराय जायतां चकोरबंधुशेखरः॥

ललाटचत्वरज्वलद्धनंजयस्फुलिंगभा
निपीतपंचसायकं नमन्निलिंपनायम्‌।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरा
कलाप्यसौम्यलोचने सदा ममास्तु संमतिः॥

करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल
द्धनंजयाहुतीकृतप्रचंडपंचसायके।
धराधरेन्द्रनंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक
प्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचने रतिर्मम॥

नवीनमेघमंडली निरुद्धदुर्धरस्फुरत्
कुहूनिशीथिनीतमः प्रबन्धबन्धकंधरः।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिंधुरः
कलावधानधुरंधरः श्रियं जगद्धुरंधरः॥

प्रफुल्लनीलपंकजप्रपंचकालिमप्रभा
वलंबिकंठकंदलीरुचिप्रबद्धकंधरम्‌।
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे॥

अखर्वसर्वमंगलाकलाकदंबमंजरी
रसप्रवाहमाधुरी तर्जनामधुरीपदे।
क्वरस्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं
गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे॥

जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर
द्धगद्धगद्विनिर्गमत्करालभालहव्यवाट्।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदंगतुंगमंगल
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डतांडवः शिवः॥

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंगमौक्तिकस्रजोर्
गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे॥

कदा निलिंपनिर्झरीनिकुंजकोटरे वसन्
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम्‌॥

इदं हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं
पठन्स्मरन् ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं
विमोहनं हि देहिनां सुशंकरस्य चिंतनम्‌॥

पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं
यः शंभुपूजनपरं पठति प्रदोषे।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मीं सदैव सुमुखीं प्रददाति शंभुः॥

भजन का अर्थ

मुखड़े का अर्थ है: "जिनके जटाजूट में गंगाजी की तरंगें प्रवाहित हो रही हैं, जिनके गले में सांपों की माला लटक रही है, और जो डमरू को डम-डम बजाकर प्रचंड तांडव करते हैं, वे शिव हमें कल्याण प्रदान करें।" इसका भावार्थ है कि भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए उनसे आशीर्वाद मांगा जा रहा है।

पहले अंतरे का भावार्थ है कि भगवान शिव के जटाजूट में गंगाजी की धाराएं बह रही हैं, जो उनके सिर पर विराजमान हैं। उनके ललाट पर अग्नि धधक रही है और उनके मस्तक पर चंद्रमा शोभायमान है। इस अंतरे में शिव के अद्भुत रूप और उनकी शक्ति का वर्णन है।

भजन का समग्र संदेश यह है कि भगवान शिव शक्ति, विनाश और सृजन के प्रतीक हैं। यह भजन शिव भक्तों को उनकी महिमा का अनुभव कराता है और उन्हें भक्ति और आनंद से भर देता है।

भजन का इतिहास

शिव तांडव स्तोत्रम् रावण द्वारा लिखा गया माना जाता है, जो भगवान शिव के एक महान भक्त थे। रावण ने यह स्तोत्र तब रचा था जब उसने कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास किया था और भगवान शिव ने उसे अपने पैर के अंगूठे से दबा दिया था।

यह भजन विभिन्न अवसरों पर गाया जाता है, जैसे कि महाशिवरात्रि, श्रावण मास, और अन्य शिव पूजाओं के दौरान। इसे मंदिरों में, घरों में और विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भी गाया जाता है।

भजन के लाभ

  • आध्यात्मिक लाभ – यह भजन भगवान शिव से जुड़ने में मदद करता है और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। इसके गायन से भक्त शिव के करीब महसूस करते हैं।
  • मानसिक लाभ – यह भजन मन को शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है। इसके सुनने से तनाव और चिंता कम होती है।
  • भक्ति का विकास – इस भजन का नियमित गायन भक्ति और श्रद्धा को बढ़ाता है। यह शिव के प्रति प्रेम और समर्पण को मजबूत करता है।

निष्कर्ष

शिव तांडव स्तोत्रम् भगवान शिव के लिए सबसे महान भक्ति रचनाओं में से एक है। इसकी संगीत सुंदरता, यह जो भावनाएं जगाता है, और जिस तरह से यह भगवान शिव की शक्ति और महिमा का वर्णन करता है, वह अद्वितीय है। यही कारण है कि पीढ़ी दर पीढ़ी भक्तों ने इसे पसंद किया है।

सभी भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे इस भजन को प्रतिदिन प्रेम से गाएं। जय शिव!

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