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Sheetala Mata Chalisa | शीतला माता चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026

Tilak Kathayein06 Apr 2026256 views📖 1 min read
शीतला माता चालीसा – Sheetala Mata Chalisa
शीतला माता चालीसा – सम्पूर्ण पाठ, शब्दार्थ, विधि और लाभ। 2026 में शीतला माता चालीसा हिंदी में पढ़ें।

शीतला माता चालीसा – परिचय

शीतला माता चालीसा देवी शीतला की स्तुति है, जिन्हें रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। इसमें चालीस चौपाइयाँ हैं जो उनकी महिमा का वर्णन करती हैं। यह चालीसा प्राचीन काल से प्रचलित है, हालांकि इसके लेखक का नाम अज्ञात है। जनश्रुति के अनुसार, यह चालीसा पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक रूप से हस्तांतरित होती रही है।

शीतला माता चालीसा का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। यह शाक्त ग्रंथ-परंपरा से जुड़ी है और भक्तों पर इसका गहरा प्रभाव है। चालीसा का पाठ करने से भक्तों को शीतला माता की कृपा प्राप्त होती है, जिससे वे रोगों से सुरक्षित रहते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह चालीसा भक्तों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक है।

शीतला माता चालीसा – सम्पूर्ण पाठ

जय जय जय शीतला भवानी। करहु कृपा सब नर और नारी॥ जय जय जय जय शीतला माता। आदि शक्ति तुम सब जग त्राता॥ रोग दोष भय हरणी माता। सदा करो सब जीवों की त्राता॥ हाथ कलश शोभित है तेरा। सदा रहे संकट से घेरा॥ स्वर्ण सिंहासन पर तुम बैठी। शीतला माता तुम हो जग में ऐठी॥ शांत स्वभाव दयालु हो तुम। सदा करे हम सब तुम्हे नमन॥ चेचक आदि रोगों से बचाओ। अपने भक्तों को सदा अपनाओ॥ तुम हो माता तुम हो रानी। सदा करो भक्तों की कल्याणी॥ गण गंधर्व करे तेरी स्तुति। तेरी माया है अद्भुत कृति॥ तुम्ही हो दुर्गा तुम्ही हो काली। तुम्ही हो माता सब से निराली॥ रोगों से मुक्ति दिलाओ माता। अपने भक्तों को सदा अपनाओ माता॥ शीतला माता तेरी जय जय हो। सदा करे हम सब तेरी सेवा हो॥ जो कोई गावे चालीसा तेरी। उस पर हो माता कृपा तेरी॥ शीतला माता तेरी आरती गाऊँ। सदा तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ॥ दोहा: शीतला माता की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

शब्द-अर्थ और भावार्थ

"जय जय जय शीतला भवानी। करहु कृपा सब नर और नारी॥" का शब्दार्थ है: शीतला भवानी की जय हो, जय हो, जय हो! हे माता, सभी मनुष्यों और नारियों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इसका भावार्थ है कि भक्त देवी शीतला से प्रार्थना कर रहे हैं कि वे सभी मनुष्यों पर अपनी दया और आशीर्वाद बनाए रखें।

पहली चौपाई में, "जय जय जय शीतला भवानी" का अर्थ है शीतला माता की बार-बार जयकार करना और उनकी महिमा का गान करना। दूसरी चौपाई में, "करहु कृपा सब नर और नारी" का अर्थ है शीतला माता से सभी मनुष्यों और स्त्रियों पर कृपा करने की प्रार्थना करना। तीसरी चौपाई में, "जय जय जय जय शीतला माता" का अर्थ है बार-बार शीतला माता की जयकार करना। चौथी चौपाई में, "आदि शक्ति तुम सब जग त्राता" का अर्थ है कि शीतला माता आदि शक्ति हैं और पूरे जगत की रक्षा करने वाली हैं। पांचवीं चौपाई में, "रोग दोष भय हरणी माता" का अर्थ है कि शीतला माता रोगों, दोषों और भय को हरने वाली हैं।

इस चालीसा में शीतला माता की महिमा इस प्रकार वर्णित है कि वे रोगों से मुक्ति दिलाने वाली, भय को हरने वाली और अपने भक्तों की रक्षा करने वाली हैं। वे आदि शक्ति हैं और पूरे जगत की त्राता हैं। उनकी कृपा से भक्तों को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

पाठ विधि और नियम

शीतला माता चालीसा का पाठ करने के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन सोमवार और शुक्रवार माने जाते हैं। पाठ के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा होता है, खासकर ब्रह्म मुहूर्त में। चालीसा का पाठ कम से कम एक बार और अधिक से अधिक 11 बार करना फलदायी होता है। पाठ करने से पहले स्नान करके पवित्र हो जाएं।

पाठ से पहले दीपक जलाएं, धूप करें, और फूल अर्पित करें। एक स्वच्छ आसन पर बैठें। पाठ करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा में रखें। मन को शांत और स्थिर रखें और पूरी श्रद्धा के साथ पाठ करें।

शीतला अष्टमी के व्रत और त्योहार पर शीतला माता चालीसा का पाठ सर्वाधिक प्रभावकारी होता है। इसके अतिरिक्त, किसी भी प्रकार के रोग से पीड़ित होने पर या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए इस चालीसा का पाठ करना विशेष फलदायी होता है।

शीतला माता चालीसा के लाभ

  • शीतला माता की विशेष कृपा – शीतला माता चालीसा का पाठ करने से शीतला माता प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को रोगों से मुक्ति का वरदान देती हैं। वे अपने भक्तों को स्वस्थ और निरोगी जीवन प्रदान करती हैं।
  • मनोकामना पूर्ति – इस चालीसा का पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, विशेषकर स्वास्थ्य और समृद्धि से संबंधित इच्छाएं। यह चालीसा भक्तों को जीवन में सफलता प्राप्त करने में मदद करती है।
  • भय और संकट से रक्षा – शीतला माता चालीसा का नियमित पाठ करने से भक्तों की भय और संकट से रक्षा होती है। यह चालीसा नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है और भक्तों को सुरक्षित रखती है।
  • मानसिक शांति – नियमित पाठ से मन शांत होता है और तनाव कम होता है। यह चालीसा भक्तों को मानसिक रूप से मजबूत बनाती है और उन्हें सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है।
  • मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति – शीतला माता चालीसा का पाठ मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। यह चालीसा भक्तों को ईश्वर के करीब ले जाती है और उन्हें आत्म-ज्ञान की प्राप्ति में मदद करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शीतला माता चालीसा कितने समय में पढ़ी जाती है?

सामान्यतः शीतला माता चालीसा को पढ़ने में 5 से 7 मिनट लगते हैं। सामान्य पाठ में केवल चालीसा का पाठ किया जाता है, जबकि विस्तारित पाठ में चालीसा के साथ आरती और अन्य स्तुतियों का भी पाठ किया जाता है, जिसमें थोड़ा अधिक समय लग सकता है।

क्या महिलाएं शीतला माता चालीसा पढ़ सकती हैं?

हां, महिलाएं शीतला माता चालीसा पढ़ सकती हैं। हिंदू धर्म में देवी की स्तुति में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाता है, और शीतला माता चालीसा का पाठ महिलाओं के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है क्योंकि शीतला माता स्वयं स्त्री स्वरूप हैं।

शीतला माता चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

दैनिक रूप से शीतला माता चालीसा का एक बार पाठ करना उत्तम माना जाता है। साप्ताहिक रूप से शुक्रवार को और विशेष अवसरों जैसे शीतला अष्टमी पर 11 बार पाठ करना विशेष फलदायी होता है।

निष्कर्ष

शीतला माता चालीसा की गहन आध्यात्मिक शक्ति इसे हिंदू धर्म में सबसे पवित्र प्रार्थनाओं में से एक बनाती है। प्राचीन परंपराओं के अनुसार, इसका नियमित पाठ अत्यंत प्रभावी है। प्रतिदिन इसका पाठ करने से भक्त का जीवन रूपांतरित हो जाता है, जिससे उन्हें स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे शीतला माता चालीसा को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाएं। यह उन्हें देवी के करीब लाने और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। जय शीतला माता!

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