Saraswati Mata Ki Aarti | सरस्वती माता की आरती – बोल, विधि और महत्व | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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Saraswati Mata Ki Aarti | सरस्वती माता की आरती – बोल, विधि और महत्व

Tilak Kathayein11 Apr 202674 views📖 1 min read
सरस्वती माता की आरती – Saraswati Mata Ki Aarti
सरस्वती माता की आरती – सम्पूर्ण आरती बोल, अर्थ और आरती करने की विधि। सरस्वती की आरती हिंदी में।

सरस्वती माता की आरती – परिचय

सरस्वती माता की आरती, ज्ञान, संगीत, कला, बुद्धि और विद्या की देवी माँ सरस्वती को समर्पित है। यह आरती विशेष रूप से वसंत पंचमी और नवरात्रि के दौरान गाई जाती है, लेकिन इसे नियमित रूप से भी गाया जा सकता है। माना जाता है कि इस आरती को पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी ने लिखा था।

हिंदू पूजा पद्धति में आरती एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जो भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करने का एक तरीका है। सरस्वती माता की आरती विशेष रूप से छात्रों, कलाकारों और विद्वानों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ज्ञान और रचनात्मकता को बढ़ाने में मदद करती है।

सरस्वती माता की आरती के बोल

जय सरस्वती माता, जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभवशालिनी, त्रिभुवन विख्याता।।

चंद्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी।।

बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला।।

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठी राधिका बनी, जग में विख्यात भई।।

तू ही हंस वाहिनी, ज्ञान दायिनी अम्बे।
तू ही शारदा माता, तू ही विद्या दे।।

यह आरती जो कोई गावे, श्रद्धा से ध्यावे।
सुख शांति पाए, बुद्धि विद्या पावे।।

जय सरस्वती माता, जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभवशालिनी, त्रिभुवन विख्याता।।

आरती का अर्थ

पहले अंतरे में माँ सरस्वती की महिमा का वर्णन है। इसमें कहा गया है कि वे सद्गुणों से परिपूर्ण हैं और तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं। उनके वैभव और गुणों की प्रशंसा की गई है।

आरती का मुख्य भाव माँ सरस्वती से ज्ञान, बुद्धि और विद्या की प्रार्थना करना है। भक्त उनसे सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं और उनकी शरण में आकर अपने जीवन को सफल बनाने की प्रार्थना करते हैं। यह आरती माँ सरस्वती की अपार महिमा का गुणगान करती है।

आरती करने की विधि

आरती की थाली में दीपक, कपूर, घी, फूल, धूप, अक्षत (चावल), और कुमकुम रखें। दीपक घी या तेल का हो सकता है और उसमें बत्ती जलाएं।

आरती को भगवान की मूर्ति के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएं। आमतौर पर, आरती को चार बार चरणों के पास, दो बार नाभि के पास, एक बार मुख के पास और सात बार पूरे शरीर के चारों ओर घुमाया जाता है। आरती करते समय श्लोक या मंत्रों का जाप करना चाहिए।

सरस्वती की आरती को सुबह (मंगला आरती) या शाम (संध्या आरती) के समय करना शुभ माना जाता है। वसंत पंचमी और नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से आरती की जाती है।

आरती के लाभ

  • सरस्वती की कृपा – सरस्वती माता की आरती करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है, जिससे ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है। यह छात्रों और विद्वानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।
  • घर में सुख-शांति – नियमित रूप से आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे सुख और शांति बनी रहती है। नकारात्मकता दूर होती है और समृद्धि आती है।
  • मनोकामना पूर्ति – श्रद्धापूर्वक आरती करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। माँ सरस्वती अपने भक्तों की प्रार्थना सुनती हैं और उन्हें आशीर्वाद देती हैं।

निष्कर्ष

सरस्वती माता की आरती का दिव्य महत्व अतुलनीय है। यह आरती लाखों भक्तों के दिलों में बसी है, जो ज्ञान और कला की देवी के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। इसका पवित्र उद्गम और सरस्वती पूजा की परंपरा में इसका विशेष स्थान इसे और भी महत्वपूर्ण बनाता है।

सभी भक्तगण इस आरती को पूरी श्रद्धा के साथ प्रतिदिन गाएं। यह आपके जीवन में ज्ञान, शांति और समृद्धि लाएगी। जय सरस्वती!

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