Santoshi Mata Ki Aarti | संतोषी माता की आरती – बोल, विधि और महत्व | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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Santoshi Mata Ki Aarti | संतोषी माता की आरती – बोल, विधि और महत्व

Tilak Kathayein11 Apr 202668 views📖 1 min read
संतोषी माता की आरती – Santoshi Mata Ki Aarti
संतोषी माता की आरती – सम्पूर्ण आरती बोल, अर्थ और आरती करने की विधि। संतोषी माता की आरती हिंदी में।

संतोषी माता की आरती – परिचय

संतोषी माता की आरती एक भक्तिमय स्तुति है जो देवी संतोषी को समर्पित है। यह आरती शुक्रवार के दिन विशेष रूप से गाई जाती है, लेकिन इसे किसी भी दिन किया जा सकता है। यह आरती संतोषी माता के भक्तों द्वारा उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए लिखी गई है।

हिंदू पूजा पद्धति में आरती का महत्वपूर्ण स्थान है, जो भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करने का एक माध्यम है। संतोषी माता की आरती विशेष रूप से भक्तों को संतोष, शांति और समृद्धि प्रदान करने वाली मानी जाती है।

संतोषी माता की आरती के बोल

जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता।
अपने सेवक जन की, सुख सम्पति दाता॥
सुन्दर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्हो।
हीरा पन्ना दमके, तन शोभा लीन्हो॥
जय संतोषी माता...
गेरू वर्ण सिंदूर, ललाट पर राजत।
मंद हँसत नयनों से, जग मानो भागत॥
जय संतोषी माता...
स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर ढुलावे।
रुप तुम्हारा निरखत, जन अति सुख पावे॥
जय संतोषी माता...
धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।
ज्ञान दान दया दो, माँ स्वीकार करो॥
जय संतोषी माता...
भक्ति भाव से आरती, जो कोई गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख सम्पति पावे॥
जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता।
अपने सेवक जन की, सुख सम्पति दाता॥

आरती का अर्थ

पहले अंतरे का शब्दार्थ है कि हे संतोषी माता, आपकी जय हो! आप अपने सेवकों को सुख और संपत्ति प्रदान करने वाली हैं। इसका भावार्थ यह है कि भक्त देवी संतोषी की महिमा का गान करते हुए उन्हें सुख-समृद्धि का दाता मानते हैं।

आरती का मुख्य भाव भक्तों द्वारा संतोषी माता से सुख, शांति, समृद्धि और ज्ञान की प्रार्थना करना है। वे माता की महिमा का वर्णन करते हुए उनसे अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की विनती करते हैं।

आरती करने की विधि

आरती की थाली में दीपक, कपूर, घी, फूल, और धूप रखें। दीपक घी का होना चाहिए, और फूल ताज़े होने चाहिए। धूप सुगंधित होनी चाहिए।

आरती को भगवान की मूर्ति के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएं। सामान्यतः आरती को चार बार चरणों पर, दो बार नाभि पर और एक बार मुख पर घुमाते हैं। आरती करते समय मंत्र या आरती के बोल बोलें।

संतोषी माता की आरती किसी भी समय की जा सकती है, लेकिन शुक्रवार को विशेष रूप से करना शुभ माना जाता है। मंगला आरती, संध्या आरती और शयन आरती के समय भी यह आरती की जा सकती है।

आरती के लाभ

  • संतोषी माता की कृपा – आरती करने से संतोषी माता प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। उनकी कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
  • घर में सुख-शांति – नियमित रूप से आरती करने से घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक होता है। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और कलह दूर होते हैं।
  • मनोकामना पूर्ति – संतोषी माता की आरती श्रद्धापूर्वक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह व्रत और पूजा का अभिन्न अंग है।

निष्कर्ष

संतोषी माता की आरती का दिव्य महत्व है। लाखों भक्तों द्वारा यह आरती प्रिय है क्योंकि यह संतोषी माता की पूजा परंपरा में विशेष है। यह आरती उनकी पवित्र उत्पत्ति और उनके प्रति प्रेम और श्रद्धा का प्रतीक है।

सभी भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे इस आरती को प्रतिदिन पूरी भक्ति के साथ गाएं। जय संतोषी माता!

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