Navagraha Mandir Guwahati | नवग्रह मंदिर गुवाहाटी 2026 – दर्शन समय, इतिहास, कैसे पहुंचें | संपूर्ण जानकारी

📋 विषय सूची
- नवग्रह मंदिर गुवाहाटी – परिचय
- इतिहास और पौराणिक कथा
- मंदिर की वास्तुकला
- दर्शन और आरती का समय
- कैसे पहुँचें
- प्रमुख त्योहार और उत्सव
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- निष्कर्ष
नवग्रह मंदिर गुवाहाटी – परिचय
नवग्रह मंदिर, असम के गुवाहाटी शहर में चित्राचल पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर नौ ग्रहों को समर्पित है, जो हिंदू ज्योतिष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गुवाहाटी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक होने के कारण, यह मंदिर अपनी खगोलीय और आध्यात्मिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ ग्रहों की पूजा अर्चना करने से भक्तों को जीवन की बाधाओं को दूर करने और सुख-शांति प्राप्त करने में मदद मिलती है।
इस मंदिर में दर्शन करने से भक्तों को ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहाँ ग्रहों की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। विशेष अवसरों पर, जैसे कि ग्रहण या ग्रह परिवर्तन के समय, भक्तों की संख्या और भी बढ़ जाती है, जिससे मंदिर का वातावरण अत्यंत भक्तिमय और आनंदमय हो जाता है। मंदिर में आने वाले लोगों को एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है, जो उन्हें आंतरिक शांति और संतोष प्रदान करता है।
नवग्रह मंदिर की अनूठी विशेषता यह है कि यहाँ प्रत्येक ग्रह का प्रतिनिधित्व एक शिवलिंग द्वारा किया जाता है, जो विभिन्न रंगों के वस्त्रों से ढका होता है। यह भारत के अन्य मंदिरों से अलग है जहाँ ग्रहों को अक्सर मूर्तियों के रूप में दर्शाया जाता है। मंदिर में ग्रहों की स्थापना एक विशिष्ट क्रम में की गई है, जो ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुरूप है, जिससे यह स्थान खगोल विज्ञान और धर्म का एक अद्भुत संगम बन जाता है।
इतिहास और पौराणिक कथा
नवग्रह मंदिर का उल्लेख कालिका पुराण में मिलता है, जिससे पता चलता है कि यह मंदिर प्राचीन काल से ही अस्तित्व में है। माना जाता है कि इस मंदिर का इतिहास गुप्त काल से भी पहले का है, और यह सदियों से ज्योतिष और खगोल विज्ञान के अध्ययन का केंद्र रहा है। प्राचीन काल में, यहाँ ऋषि-मुनि और विद्वान ग्रहों की गति और उनके प्रभावों का अध्ययन करने के लिए आते थे।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना के बाद ग्रहों को स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने सभी नौ ग्रहों को एक स्थान पर एकत्रित किया और उन्हें सृष्टि के संचालन में अपनी भूमिका निभाने का आदेश दिया। इसी स्थान पर, ग्रहों ने अपनी शक्तियों का प्रदर्शन किया, जिसके परिणामस्वरूप यह स्थान नवग्रह मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित हो गया। इस कथा में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु जैसे ग्रहों का महत्वपूर्ण योगदान बताया गया है।
अहोम राजाओं के शासनकाल में इस मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ था। 18वीं शताब्दी में, राजा राजेश्वर सिंह ने मंदिर को पत्थर और ईंटों से बनवाया, जिससे इसे एक नया स्वरूप मिला। 1897 में आए भूकंप में मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद इसे फिर से बनाया गया। वर्तमान स्वरूप में मंदिर अहोम वास्तुकला और आधुनिक निर्माण तकनीकों का मिश्रण है।
मंदिर की वास्तुकला
नवग्रह मंदिर की वास्तुकला असमिया शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें नागर शैली के तत्व भी दिखाई देते हैं। मंदिर का शिखर अपेक्षाकृत छोटा है, जो असम के मंदिरों की विशेषता है। मंदिर का क्षेत्रफल लगभग 1000 वर्ग मीटर है, और इसके निर्माण में मुख्य रूप से पत्थर और ईंटों का उपयोग किया गया है।
गर्भगृह में नौ शिवलिंग स्थापित हैं, जो प्रत्येक ग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रत्येक शिवलिंग को ग्रह के रंग के अनुसार वस्त्रों से ढका गया है। सभामंडप में भक्तों के लिए बैठने की व्यवस्था है, जहाँ वे पूजा और प्रार्थना कर सकते हैं। द्वार की सजावट में पारंपरिक असमिया रूपांकनों का उपयोग किया गया है, जो मंदिर की सुंदरता को बढ़ाते हैं।
मंदिर परिसर में एक कुंड भी है, जिसे सूर्य कुंड कहा जाता है, और इसका जल पवित्र माना जाता है। इसके अतिरिक्त, परिसर में कई छोटे मंदिर भी हैं जो अन्य देवी-देवताओं को समर्पित हैं। मंदिर में शिलालेख भी मौजूद हैं जो इसके इतिहास और निर्माण के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।
दर्शन और आरती का समय
नवग्रह मंदिर गुवाहाटी में दर्शन का समय सुबह 6:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक है। मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है, लेकिन विशेष पूजा और अनुष्ठानों के लिए शुल्क देना होता है। मंदिर पूरे सप्ताह खुला रहता है, जिससे भक्तों को अपनी सुविधानुसार दर्शन करने का अवसर मिलता है।
| आरती / सेवा | समय | विशेषता |
|---|---|---|
| मंगला आरती | सुबह 6:30 बजे | दिन की शुरुआत में ग्रहों की आराधना |
| अभिषेक / पूजा | सुबह 7:00 बजे - दोपहर 12:00 बजे | ग्रहों को समर्पित विशेष अनुष्ठान |
| भोग आरती | दोपहर 12:30 बजे | ग्रहों को भोग अर्पित करना |
| संध्या आरती | शाम 6:00 बजे | दिन के अंत में ग्रहों की स्तुति |
| शयन आरती | शाम 6:45 बजे | ग्रहों को शयन के लिए तैयार करना |
नवग्रह मंदिर में दर्शन के लिए उचित पोशाक पहनना अनिवार्य है, जिसमें शालीन कपड़े शामिल हैं। मंदिर परिसर में फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है ताकि पूजा और ध्यान के माहौल को बनाए रखा जा सके। मोबाइल फोन को स्विच ऑफ या साइलेंट मोड पर रखने का अनुरोध किया जाता है, और जूते-चप्पल मंदिर के बाहर रखने होते हैं।
कैसे पहुँचें
🚗 सड़क मार्ग
नवग्रह मंदिर गुवाहाटी तक सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। गुवाहाटी शहर से मंदिर की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है। दिसपुर से यह दूरी लगभग 10 किलोमीटर है। राष्ट्रीय राजमार्ग 27 मंदिर के पास से गुजरता है। गुवाहाटी में बस और टैक्सी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हैं जो मंदिर तक पहुंचने में सहायक होती हैं।
🚂 रेल मार्ग
नवग्रह मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन गुवाहाटी रेलवे स्टेशन है, जो लगभग 5 किलोमीटर दूर है। स्टेशन से मंदिर तक पहुंचने में रिक्शा या टैक्सी से लगभग 15-20 मिनट लगते हैं। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, और यहां कई महत्वपूर्ण ट्रेनें रुकती हैं।
✈️ वायु मार्ग
नवग्रह मंदिर का निकटतम हवाई अड्डा लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 25 किलोमीटर दूर है। हवाई अड्डे से मंदिर तक पहुंचने में टैक्सी से लगभग 45-60 मिनट लगते हैं। हवाई अड्डे से शहर के लिए नियमित टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं।
प्रमुख त्योहार और उत्सव
- अंबुबाची मेला – जून – इस त्योहार के दौरान कामाख्या मंदिर के साथ-साथ नवग्रह मंदिर में भी विशेष पूजा अर्चना की जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
- शिवरात्रि – फरवरी/मार्च – इस अवसर पर विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं, जिसमें भगवान शिव और नवग्रहों की आराधना की जाती है।
- नवरात्रि – अक्टूबर/नवंबर – नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें देवी दुर्गा और नवग्रहों की स्तुति की जाती है।
नवग्रह मंदिर में हर वर्ष ग्रहों की शांति के लिए विशेष यज्ञ और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। इन उत्सवों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है, क्योंकि ये लोगों को एक साथ आने और अपनी आस्था को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं। मंदिर में आयोजित होने वाले मेलों में स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन किया जाता है, जो दर्शकों को आकर्षित करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नवग्रह मंदिर गुवाहाटी के दर्शन का समय क्या है?
इस दौरान, भक्त ग्रहों की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। विभिन्न आरतियों के समय भी दर्शन के लिए विशेष महत्व होता है, जैसे कि मंगला आरती सुबह 6:30 बजे और संध्या आरती शाम 6:00 बजे होती है।
नवग्रह मंदिर गुवाहाटी कहाँ स्थित है?
यह शहर के केंद्र से लगभग 6 किलोमीटर दूर है और आसानी से सड़क मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है। मंदिर एक शांत और रमणीय स्थान पर स्थित है, जो इसे ध्यान और प्रार्थना के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है।
नवग्रह मंदिर गुवाहाटी जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
नवग्रह मंदिर गुवाहाटी जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच होता है, जब मौसम सुहावना रहता है। इस दौरान तापमान मध्यम होता है, जो यात्रा और दर्शन के लिए अनुकूल होता है। अंबुबाची मेला और शिवरात्रि जैसे त्योहारों के दौरान भी यात्रा करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
नवग्रह मंदिर गुवाहाटी में प्रवेश शुल्क कितना है?
नवग्रह मंदिर गुवाहाटी में प्रवेश निःशुल्क है। हालांकि, विशेष पूजा और अनुष्ठानों के लिए भक्तों को शुल्क देना होता है। मंदिर प्रशासन द्वारा वीआईपी दर्शन की कोई विशेष व्यवस्था नहीं है, लेकिन सभी भक्तों को समान रूप से दर्शन करने का अवसर मिलता है।
निष्कर्ष
नवग्रह मंदिर गुवाहाटी प्रत्येक हिंदू के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है क्योंकि यह नौ ग्रहों की एक साथ पूजा करने का अनूठा अवसर प्रदान करता है। यहाँ की दिव्य ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण भक्तों को आंतरिक शांति और समृद्धि का अनुभव कराते हैं। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि ज्योतिषीय ज्ञान और खगोलीय अध्ययन का भी केंद्र है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाता है।
नवग्रह मंदिर गुवाहाटी की यात्रा की योजना बना रहे भक्तों के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव हैं: उचित पोशाक पहनें, विनम्रता और श्रद्धा के साथ दर्शन करें, और ग्रहों की स्तुति में भाग लें। ऐसा करने से आपको ग्रहों का आशीर्वाद मिलेगा और आपके जीवन में सुख-समृद्धि आएगी। जय नवग्रह!
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