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ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

देवता: भगवान शिव (महामृत्युंजय)

आज का मंत्र

अर्थ

हम त्रिनेत्रधारी शिव की आराधना करते हैं, जो सबका पोषण करते हैं — वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त कर अमरता प्रदान करें।

जप का लाभ

रोग-भय दूर होता है, दीर्घायु और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

इस मंत्र का 108 बार जाप करें — मन शांत, जीवन में शुभ फल की प्राप्ति होगी

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📿 जाप विधि

  1. 1सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और शांत, पवित्र स्थान पर भगवान शिव (महामृत्युंजय) का ध्यान करते हुए बैठें।
  2. 2पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें और भगवान शिव (महामृत्युंजय) को बेलपत्र और जल अर्पित करें।
  3. 3रुद्राक्ष या तुलसी की माला से «ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥» मंत्र का 108 बार (एक माला) जाप करें।
  4. 4मन को एकाग्र रखते हुए, भगवान शिव (महामृत्युंजय) के प्रति श्रद्धा और भक्ति भाव से उच्चारण करें।
  5. 5नियमित रूप से रोज़ जाप करने से भगवान शिव (महामृत्युंजय) की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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