आरती

Kali Mata Ki Aarti | काली माता की आरती – बोल, विधि और महत्व

Tilak Kathayein12 Apr 2026170 views📖 1 min read
काली माता की आरती – Kali Mata Ki Aarti
काली माता की आरती – सम्पूर्ण आरती बोल, अर्थ और आरती करने की विधि। काली माता की आरती हिंदी में।

काली माता की आरती – परिचय

काली माता की आरती, माँ काली की स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्तिपूर्ण गीत है। यह आरती माँ काली के भक्तों द्वारा उनकी पूजा के दौरान गाई जाती है। माना जाता है कि इस आरती की रचना प्राचीन काल में किसी अज्ञात भक्त द्वारा की गई थी। यह आरती माँ काली के शक्तिशाली और करुणामयी स्वरूप का वर्णन करती है।

हिंदू पूजा पद्धति में आरती का विशेष महत्व है। यह भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करने का एक तरीका है। काली माता की आरती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह माँ काली की शक्ति और सुरक्षा का आह्वान करती है, जिससे भक्तों को भय और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है।

काली माता की आरती के बोल

जय काली माता, मैया जय काली माता।
कालरात्रि माता, मैया जय काली माता॥

काली रूप तेरा, मैया अति विकराला।
दुष्टों का संहारण, मैया भक्तन प्रतिपाला॥

गले मुंड माला, मैया खप्पर तेरा भरा।
रक्त बीज का संहार, मैया तूने ही करा॥

सिंहासन तेरा, मैया पर्वत की चोटी।
ध्यान लगाए तेरा, मैया योगी और कोटी॥

ब्रह्मा विष्णु महेश, मैया तेरे गुण गाते।
नारद मुनि भी, मैया तेरा ध्यान लगाते॥

शरणागत तेरे, मैया दुख से तर जाते।
दर्शन तेरा पाके, मैया भव से तर जाते॥

जय काली माता, मैया जय काली माता।
कालरात्रि माता, मैया जय काली माता॥

आरती का अर्थ

पहले अंतरे में, भक्त माँ काली की जय-जयकार करते हुए उन्हें कालीरात्रि माता के रूप में संबोधित करता है। यह उनके भयानक और शक्तिशाली स्वरूप का वर्णन करता है, जो अंधकार और नकारात्मकता का नाश करने वाला है।

आरती का मुख्य भाव माँ काली के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास व्यक्त करना है। भक्त उनसे सुरक्षा, शक्ति और मुक्ति की कामना करते हैं, और उनकी महिमा का गुणगान करते हैं। यह आरती माँ काली के भक्तों को उनके प्रति अटूट श्रद्धा और प्रेम का अनुभव कराती है।

आरती करने की विधि

आरती की थाली में दीपक, कपूर, घी, फूल, धूप, रोली, अक्षत और जल रखें। दीपक में घी डालकर उसे प्रज्वलित करें।

आरती की थाली को माँ काली की मूर्ति के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएं। आमतौर पर चार बार चरणों पर, दो बार नाभि पर और एक बार मुख पर घुमाया जाता है। आरती करते समय मंत्र या आरती के बोल गाते रहें।

काली माता की आरती संध्या आरती के समय करना सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अतिरिक्त, मंगला आरती और शयन आरती के समय भी यह आरती की जा सकती है।

आरती के लाभ

  • काली माता की कृपा – काली माता की आरती करने से उनकी असीम कृपा प्राप्त होती है। यह आरती भक्तों को भय, नकारात्मकता और कष्टों से मुक्ति दिलाती है।
  • घर में सुख-शांति – नियमित रूप से आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-शांति बनी रहती है। यह वातावरण को शुद्ध और पवित्र बनाती है।
  • मनोकामना पूर्ति – काली माता की आरती सच्चे मन से करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह जीवन में सफलता और समृद्धि लाती है।

निष्कर्ष

काली माता की आरती का दिव्य महत्व है। यह आरती लाखों भक्तों के दिलों में बसी हुई है, और माँ काली की उपासना में इसका एक विशेष स्थान है। इसकी पवित्र उत्पत्ति और माँ काली के प्रति गहरी श्रद्धा इसे अद्वितीय बनाती है। यह आरती भक्तों को शक्ति, सुरक्षा और मुक्ति का मार्ग दिखाती है।

सभी भक्त इस आरती को पूर्ण भक्ति और श्रद्धा के साथ प्रतिदिन गाएं। यह आपको माँ काली के आशीर्वाद से जोड़ेगी और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी। जय काली माता!

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आज का पंचांग 29 अगस्त 2026

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