एकादशी व्रत कथा

Indira Ekadashi | इंदिरा एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026

Tilak Kathayein18 May 2026133 views📖 1 min read
इंदिरा एकादशी – Indira Ekadashi
इंदिरा एकादशी 2026 – व्रत कथा, विधि, क्या खाएं, शुभ मुहूर्त और लाभ। भगवान विष्णु की कृपा पाएं।

इंदिरा एकादशी – परिचय

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी पितृ पक्ष में आती है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में इंदिरा एकादशी 21 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। इस एकादशी का नाम 'इंदिरा' इसलिए है क्योंकि यह एकादशी 🙏 श्री हरि 🙏 की कृपा से सभी प्रकार के कष्टों का निवारण कर व्यक्ति को इंद्रलोक के समान सुख प्रदान करती है।

सभी एकादशियों में इंदिरा एकादशी को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है। यह व्रत न केवल जीवित अवस्था के पापों का नाश करता है, बल्कि पूर्वजों की आत्माओं को भी शांति और मुक्ति प्रदान करता है, जिससे समस्त पितृ दोष शांत हो जाते हैं।

इंदिरा एकादशी की व्रत कथा

प्राचीन काल में महिष्मती नामक एक नगरी में इंद्रसेन नामक राजा राज्य करते थे। राजा अपनी प्रजा का पालन उसी प्रकार करते थे जैसे एक पिता अपने पुत्रों का करता है। एक दिन, राजा इंद्रसेन के दरबार में नारद मुनि पधारे। नारद जी ने राजा को बताया कि उनके पिता की आत्मा स्वर्ग से च्युत हो गई है क्योंकि उन्होंने अपने जीवनकाल में कोई विशेष पुण्य कर्म नहीं किया था।

नारद मुनि ने राजा को उपाय बताया कि यदि वह भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी का व्रत विधि-विधान से करें और उसका पुण्य अपने पिता को समर्पित कर दें, तो उनके पिता को मोक्ष की प्राप्ति होगी। राजा इंद्रसेन ने नारद जी की आज्ञा का पालन करने का संकल्प लिया। उन्होंने दशमी तिथि से ही व्रत के नियमों का पालन करना शुरू कर दिया।

एकादशी के दिन राजा ने विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की, व्रत रखा और रात में जागरण किया। द्वादशी के दिन पारण करके उन्होंने व्रत का पुण्य अपने पिता को समर्पित कर दिया। उसी क्षण राजा के पिता को मोक्ष मिल गया और वे स्वर्गलोक को प्राप्त हुए। इस प्रकार, इंदिरा एकादशी का व्रत करने से पितरों को मुक्ति मिलती है और वंशजों को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

व्रत विधि

दशमी की रात्रि से ही व्रत की शुरुआत हो जाती है। इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। देर रात तक जागना और अगले दिन एकादशी के नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है।

एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के समक्ष व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु की पूजा के लिए पंचामृत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि का प्रयोग करें। तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करते रहें।

समयकरने का कार्य
प्रातःकालसूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें।
सुबहभगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
दोपहरभगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें, मंत्र जाप करें।
शामसंध्या आरती करें, भजन-कीर्तन में लीन रहें।
रात्रिभगवान के नाम का स्मरण करते हुए जागरण करें।

द्वादशी तिथि के सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें। पारण के समय श्रीविष्णु भगवान का स्मरण कर ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें। उसके उपरांत स्वयं सात्विक भोजन ग्रहण करें।

व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं

इंदिरा एकादशी के व्रत में फलाहार का विधान है। आप फल, दूध, दही, पनीर, सिंघाड़ा, साबूदाना, कुट्टू का आटा, मेवे (जैसे बादाम, काजू, किशमिश) आदि का सेवन कर सकते हैं। इन सभी वस्तुओं को सात्विक भाव से तैयार करना चाहिए।

इस व्रत में चावल का सेवन पूर्णतः वर्जित है। इसके अतिरिक्त, किसी भी प्रकार की दाल, अनाज, लहसुन, प्याज, और मांसाहार का सेवन भी नहीं करना चाहिए। चावल वर्जित होने का कारण यह है कि ऐसी मान्यता है कि चावल में जल तत्व की प्रधानता होती है और एकादशी के दिन जल तत्व का सेवन भगवान विष्णु को अप्रसन्न कर सकता है।

इंदिरा एकादशी व्रत के लाभ

  • पाप-मोचन – इंदिरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। पुराणों के अनुसार, यह व्रत करने से ब्रह्महत्या जैसे महापाप का भी प्रायश्चित हो जाता है।
  • मोक्ष प्राप्ति – इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को मृत्यु के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह बैकुंठ धाम को प्राप्त होता है।
  • सांसारिक लाभ – यह व्रत जीवन में सुख, समृद्धि, धन और ऐश्वर्य प्रदान करता है। परिवार में खुशहाली बनी रहती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  • स्वास्थ्य लाभ – उपवास रखने से शरीर की पाचन क्रिया सुधरती है और विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में इंदिरा एकादशी कब है?

वर्ष 2026 में इंदिरा एकादशी 21 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत रखने का शुभ मुहूर्त 21 सितंबर को सुबह 08:25 से 22 सितंबर को सुबह 09:33 तक रहेगा।

इंदिरा एकादशी व्रत में चावल क्यों नहीं खाते?

शास्त्रों के अनुसार, चावल को जल तत्व का प्रतीक माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि एकादशी के दिन जल तत्व का सेवन भगवान विष्णु को अप्रसन्न करता है। इसलिए, सभी एकादशी व्रतों में चावल का त्याग किया जाता है, विशेषकर इंदिरा एकादशी में।

क्या बीमार व्यक्ति इंदिरा एकादशी व्रत रख सकता है?

बीमार, गर्भवती महिलाएं या वृद्ध व्यक्ति पूर्ण उपवास न रखकर फलाहार या एक समय का भोजन कर सकते हैं। वे चाहें तो किसी योग्य योग्य ब्राह्मण को दान देकर भी व्रत का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष

इंदिरा एकादशी का आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय है। जो भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस एकादशी का व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु उन्हें सभी कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं और उन्हें इंद्रलोक के समान सुख प्रदान करते हैं। इसीलिए इसे सभी एकादशियों में श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि यह न केवल वर्तमान जीवन को सुखमय बनाती है, बल्कि पितरों को भी मुक्ति दिलाकर उन्हें शांति प्रदान करती है।

सभी भक्तों को पूर्ण आस्था और समर्पण के साथ इंदिरा एकादशी का व्रत करना चाहिए। यह व्रत सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला और जीवन को सफल बनाने वाला है। जय श्री हरि! जय एकादशी माता!

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आज का पंचांग 22 अगस्त 2026

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