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16 अगस्त 2026 का पंचांग

चतुर्थी | शुक्ल पक्ष | श्रावण

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तिथि
चतुर्थी
नक्षत्र
हस्त
🌿
योग
साध्य
📿
करण
विष्टि
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🌅 06:03 AM   🌇 06:59 PM

📅 पंचांग16 अगस्त 2026

तिथिचतुर्थी (शुक्ल पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वाररविवार
नक्षत्रहस्त (सावित्र)
योगसाध्य
करणविष्टि
चंद्र राशिकन्या
सूर्य राशिकर्क
🌅 सूर्योदय06:03 AM
🌇 सूर्यास्त06:59 PM

🪐 ग्रह दशा16 अगस्त 2026

☀️सूर्यकर्क29°
🌙चंद्रकन्या11.4°
मंगलमेष26.7°
बुधमिथुन0.4°
गुरुकर्क8.1°
शुक्रधनु16.1°
शनिमीन20.8°
राहुकुंभ5.9°
केतुसिंह5.9°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को रविवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌓

🌙 आज की तिथि का महत्व

चतुर्थी · शुक्ल पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी, विनायक चतुर्थी

चतुर्थी गणपति बप्पा की प्रिय तिथि है। इस दिन गणेश पूजा से सभी विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

✅ आज क्या करें

गणेश पूजा, मोदक अर्पण, दूर्वा अर्पण, गणेश चालीसा

⚠️ आज से बचें

चंद्र दर्शन, झूठ बोलना

⭐ आज का नक्षत्र: हस्त

देवता: सावित्र

हस्त कुशलता और पुरुषार्थ का नक्षत्र है। हाथों से किए जाने वाले कार्य सफल होते हैं।

✅ आज क्या करें

व्यापार, हस्तकला, कृषि, शिक्षा

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

🌙
१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: चतुर्थी (शुक्ल पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: रविवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: हस्त
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: साध्य
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: विष्टि

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न