14 अगस्त 2026 का पंचांग – द्वितीया शुक्ल पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
🕉

14 अगस्त 2026 का पंचांग

द्वितीया | शुक्ल पक्ष | श्रावण

🌙
तिथि
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी
🌿
योग
परिघ
📿
करण
बालव
शहर चुनें:
🌅 06:03 AM   🌇 07:01 PM

📅 पंचांग14 अगस्त 2026

तिथिद्वितीया (शुक्ल पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वारशुक्रवार
नक्षत्रपूर्वा फाल्गुनी (भग)
योगपरिघ
करणबालव
चंद्र राशिसिंह
सूर्य राशिकर्क
🌅 सूर्योदय06:03 AM
🌇 सूर्यास्त07:01 PM

🪐 ग्रह दशा14 अगस्त 2026

☀️सूर्यकर्क27.1°
🌙चंद्रसिंह14.1°
मंगलमेष25.6°
बुधवृष22.2°
गुरुकर्क7.9°
शुक्रधनु12.9°
शनिमीन20.7°
राहुकुंभ6°
केतुसिंह6°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को शुक्रवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌒

🌙 आज की तिथि का महत्व

द्वितीया · शुक्ल पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: भाई दूज (कार्तिक शुक्ल द्वितीया)

द्वितीया तिथि सृष्टि के निर्माता ब्रह्माजी को समर्पित है। इस दिन नए कार्य का शुभारंभ और शिक्षा के कार्य शुभ होते हैं।

✅ आज क्या करें

नए व्यापार का आरंभ, शिक्षा प्रारंभ, दान-पुण्य

⚠️ आज से बचें

झूठ बोलना, कलह

⭐ आज का नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी

देवता: भग

पूर्वा फाल्गुनी आनंद और प्रेम का नक्षत्र है। विवाह और सौंदर्य से जुड़े कार्य शुभ।

✅ आज क्या करें

विवाह, प्रेम, कला, सौंदर्य

⚠️ आज से बचें

यात्रा, कठोर कार्य

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

🌙
१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: द्वितीया (शुक्ल पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: शुक्रवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: पूर्वा फाल्गुनी
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: परिघ
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: बालव

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न