10 अगस्त 2026 का पंचांग – द्वादशी कृष्ण पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
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10 अगस्त 2026 का पंचांग

द्वादशी | कृष्ण पक्ष | श्रावण

🌙
तिथि
द्वादशी
नक्षत्र
आर्द्रा
🌿
योग
वज्र
📿
करण
तैतिल
शहर चुनें:
🌅 06:01 AM   🌇 07:04 PM

📅 पंचांग10 अगस्त 2026

तिथिद्वादशी (कृष्ण पक्ष)
मासश्रावण (वि.सं. 2083)
वारसोमवार
नक्षत्रआर्द्रा (रुद्र)
योगवज्र
करणतैतिल
चंद्र राशिमिथुन
सूर्य राशिकर्क
🌅 सूर्योदय06:01 AM
🌇 सूर्यास्त07:04 PM

🪐 ग्रह दशा10 अगस्त 2026

☀️सूर्यकर्क23.2°
🌙चंद्रमिथुन16°
मंगलमेष23.5°
बुधवृष5.8°
गुरुकर्क7.6°
शुक्रधनु6.5°
शनिमीन20.6°
राहुकुंभ6.2°
केतुसिंह6.2°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌒

🌙 आज की तिथि का महत्व

द्वादशी · कृष्ण पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: एकादशी पारण

कृष्ण द्वादशी में एकादशी व्रत का पारण होता है। समय पर पारण करना अत्यंत आवश्यक है।

✅ आज क्या करें

व्रत पारण, ब्राह्मण भोजन, विष्णु पूजा

⚠️ आज से बचें

पारण में अनुचित देरी

⭐ आज का नक्षत्र: आर्द्रा

देवता: रुद्र

आर्द्रा परिवर्तन का नक्षत्र है। तकनीकी कार्य और नए ज्ञान की खोज शुभ।

✅ आज क्या करें

तकनीकी कार्य, अनुसंधान

⚠️ आज से बचें

विवाह, शुभ कार्य

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

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१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: द्वादशी (कृष्ण पक्ष)
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२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: सोमवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: आर्द्रा
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: वज्र
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: तैतिल

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न