29 जून 2026 का पंचांग – पूर्णिमा शुक्ल पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
🕉

29 जून 2026 का पंचांग

पूर्णिमा | शुक्ल पक्ष | ज्येष्ठ

🌙
तिथि
पूर्णिमा
नक्षत्र
मूल
🌿
योग
शुक्ल
📿
करण
विष्टि
शहर चुनें:
🌅 05:44 AM   🌇 07:17 PM

📅 पंचांग29 जून 2026

तिथिपूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)
मासज्येष्ठ (वि.सं. 2083)
वारसोमवार
नक्षत्रमूल (निर्ऋति)
योगशुक्ल
करणविष्टि
चंद्र राशिधनु
सूर्य राशिमिथुन
🌅 सूर्योदय05:44 AM
🌇 सूर्यास्त07:17 PM

🪐 ग्रह दशा29 जून 2026

☀️सूर्यमिथुन13.1°
🌙चंद्रधनु2.3°
मंगलमेष1.5°
बुधवृश्चिक13.9°
गुरुकर्क4.1°
शुक्रकन्या29.2°
शनिमीन19.2°
राहुकुंभ8.5°
केतुसिंह8.5°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌕

🌙 आज की तिथि का महत्व

पूर्णिमा · शुक्ल पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: पूर्णिमा व्रत, सत्यनारायण पूजा, गुरु पूर्णिमा

पूर्णिमा अत्यंत शुभ और पवित्र तिथि है। चंद्रमा इस दिन अपनी सोलह कलाओं में पूर्ण होते हैं। दान-पुण्य और तीर्थ स्नान का अपार महत्व है।

✅ आज क्या करें

पवित्र नदी स्नान, दान, पितृ तर्पण, सत्यनारायण कथा, चंद्र अर्घ्य

⚠️ आज से बचें

झूठ, चोरी, बुरी नज़र

⭐ आज का नक्षत्र: मूल

देवता: निर्ऋति

मूल जड़ों और गहराई का नक्षत्र है। रहस्य और चिकित्सा से जुड़े कार्य शुभ।

✅ आज क्या करें

अनुसंधान, जड़ी-बूटी, दवाइयाँ

⚠️ आज से बचें

विवाह, नई शुरुआत

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

🌙
१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)
📅
२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: सोमवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: मूल
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: शुक्ल
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: विष्टि

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न