26 जून 2026 का पंचांग – द्वादशी शुक्ल पक्ष | शुभ मुहूर्त और राशिफल - Tilak Kathayein
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26 जून 2026 का पंचांग

द्वादशी | शुक्ल पक्ष | ज्येष्ठ

🌙
तिथि
द्वादशी
नक्षत्र
विशाखा
🌿
योग
सिद्ध
📿
करण
बव
शहर चुनें:
🌅 05:43 AM   🌇 07:16 PM

📅 पंचांग26 जून 2026

तिथिद्वादशी (शुक्ल पक्ष)
मासज्येष्ठ (वि.सं. 2083)
वारशुक्रवार
नक्षत्रविशाखा (इंद्र-अग्नि)
योगसिद्ध
करणबव
चंद्र राशितुला
सूर्य राशिमिथुन
🌅 सूर्योदय05:43 AM
🌇 सूर्यास्त07:16 PM

🪐 ग्रह दशा26 जून 2026

☀️सूर्यमिथुन10.2°
🌙चंद्रतुला26.6°
मंगलमीन29.9°
बुधवृश्चिक1.6°
गुरुकर्क3.8°
शुक्रकन्या24.4°
शनिमीन19.1°
राहुकुंभ8.6°
केतुसिंह8.6°

🕉 ॐ तत्सत् — हरि ॐ तत्सत् 🕉

सभी को शुक्रवार की हार्दिक शुभकामनाएं


🌖

🌙 आज की तिथि का महत्व

द्वादशी · शुक्ल पक्ष

🙏
व्रत / पर्व: वैकुंठ द्वादशी, गोविंद द्वादशी, एकादशी पारण

द्वादशी भगवान विष्णु के वामन अवतार को समर्पित है। एकादशी व्रत का पारण इसी तिथि में किया जाता है।

✅ आज क्या करें

व्रत पारण, विष्णु पूजा, ब्राह्मण भोजन, दान

⚠️ आज से बचें

व्रत पारण में देरी करना

⭐ आज का नक्षत्र: विशाखा

देवता: इंद्र-अग्नि

विशाखा उद्देश्य और दृढ़ता का नक्षत्र है। लक्ष्य प्राप्ति के प्रयास सफल होते हैं।

✅ आज क्या करें

साहसिक कार्य, प्रतिस्पर्धा, धर्म कार्य

⚠️ आज से बचें

मित्रता में विवाद

📖 पंचांग क्या है और इसका महत्व

पंचांग एक प्राचीन हिंदू कालगणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। "पंचांग" शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — पंच अर्थात् पाँच, और अंग अर्थात् भाग। इस प्रकार पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का आरंभ हो या लंबी यात्रा — पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। पंचांग केवल धार्मिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि कृषि, मौसम-परिवर्तन और व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सहायक है।

🕉 पंचांग के पाँच अंग

🌙
१. तिथि

चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत, पूजा और शुभ कार्यों के लिए सही तिथि जानना अत्यंत आवश्यक है।

आज: द्वादशी (शुक्ल पक्ष)
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२. वार

सप्ताह के सात दिन सात ग्रहों के नाम पर हैं। सोमवार (चंद्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि), रविवार (सूर्य)।

आज: शुक्रवार
३. नक्षत्र

चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में संचरण करता है। 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक का अपना देवता और गुण है।

आज: विशाखा
🌿
४. योग

सूर्य और चंद्रमा के देशांतर का योग करने पर जो अंश आते हैं उनसे योग निकाला जाता है। 27 योग होते हैं।

आज: सिद्ध
📿
५. करण

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। 11 करण होते हैं — 4 स्थिर और 7 चर। भद्रा करण में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

आज: बव

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न